कनकासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

हेल्थ डेस्क- कनकासव एक आयुर्वेदिक औषधि है. जिसका उपयोग कई प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है. श्वास रोगों एवं कफ जनित रोगों जैसे अस्थमा एवं क्षय ( TB ) में इसका सेवन मुख्य रूप से प्रयोग किया जाता है.

अगर इसके नाम की बात करें तो इसका नाम दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है. कनक और आसव. कनक संस्कृत में धतूरे को कहा जाता है. इसको बनाने में मुख्य रूप से धतूरे का प्रयोग किया जाता है. कनकासव कफ जनित रोगों जैसे खांसी, दमा, सांस लेने में परेशानी होना एवं क्षय जैसी समस्याओं में काफी लाभदायक औषधि होती है.
आज हम इस लेख के माध्यम से कनकासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदों के बारे में बताएंगे.

कनकासव बनाने के लिए इन जड़ी- बूटियों की आवश्यकता होगी.

धतूरे का पंचांग 16 तोला, अडूसा का मूल 16 तोला, धायफूल 64 तोला, तालीसपत्र 8 तोला, भारंगी 8 तोला, सोठ 8 तोला, कंटकारी 8 तोला, नागकेसर 8 तोला, पीपल 8 तोला, मुलेठी 8 तोला, काली द्राक्ष 1 सेर, सभी को अधकुटा करके 25 से पानी में उबालें. जब 9 सेर पानी रह जाए इसे सभी जड़ी- बूटियों सहित बरनी ( घड़ा ) में डालें. अब इसमें शहद 2.5 सेर, शक्कर 5 सेर डालकर मुखमुद्रा करके 40 दिन के लिए छोड़ दें. 40 दिन बाद छानकर सुरक्षित रखें यही कनकासव है.

कनकासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

कनकासव के उपयोग एवं फायदे-

मात्रा- 1 से 4 तोला खाना खाने के बाद दिन में दो बार उतने ही पानी मिलाकर सेवन करें. यह एक सामान्य मात्रा है लेकिन रोग और रोगी के प्रकृति के अनुसार मात्रा को घटाया या बढाया जा सकता है. इसका निर्धारण एक योग्य चिकित्सक ही कर सकता है. इसलिए चिकित्सक के सलाहानुसार ही सेवन करना चाहिए.

कनकासव पीने के फायदे-

  • कनकासव श्वास, कास ( खांसी ), पुराना बुखार, प्रतिश्याय और मलेरिया को दूर करता है.
  • श्वास, कास की उग्र अवस्था में कनकासव का उपयोग अधिकतर किया जाता है, क्योंकि श्वास नलिका की श्लेष्मिक त्वचा को शिथिल करके यह दम्मे की पीड़ा को दूर करता है. इसलिए श्वास नलिका में संकोच विकास प्रधान रोगों में इसका उपयोग विशेष रूप से करना अधिक फायदेमंद होता है.
  • श्वास नली की सूजन और फेफड़ों के रोगों में इसका बहुत उपयोग किया जाता है. इससे कफ ढीला होकर निकलने लगता है. श्वास नली की संकुचित होने की शक्ति कम हो जाती है और दम्मे का वेग बंद हो जाता है.
* कनकासव की तासीर गर्म होती है. जिसके वजह से इसका सेवन कई प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है. उन्हीं में से एक है खांसी समस्या. इसका सेवन करने से खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. क्योंकि यह कफ को पतला कर निकालने में काफी मददगार होता है.
* क्षय से जुड़ी समस्या में भी कनकासव का सेवन कर सकते हैं. इसमें भी आपको कनकासव सिरप का सेवन करने से काफी लाभ होता है. क्षय एक भयानक बीमारी है जिसका लक्षण अगर शुरू में ना पहचाना जाए तो इससे व्यक्ति की जान भी जाने का खतरा बना रहता है.
* अगर आप पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या से परेशान हैं तो आपको कनकासव का सेवन अवश्य करना चाहिए. इससे आपको काफी लाभ मिलता है. पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या का मुख्य वजह हमारा लीवर पर निर्भर होता है. लीवर में किसी तरह की समस्या होने पर इसका खामियाजा पूरे पाचन तंत्र को भुगतना पड़ता है.

* जब हमारे गले में दर्द होता है. गले में दर्द होने के साथ-साथ गले में जलन और खिचखिच जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती है. इससे हमें सबसे अधिक तकलीफ खाना खाते समय होता है. जब हम किसी भी चीज को निगलते हैं तो उस समय हमें काफी परेशानी होती है. कभी-कभी तो दर्द इतना अधिक हो जाता है कि पानी पीते समय भी हमारे गले में दर्द होने लगता है. इस समस्या का मुख्य कारण वायरल इंफेक्शन होता है. आमतौर पर गले की यह समस्या अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन जब हमारा यह समस्या अपने आप ठीक नहीं होता है तो दवा खाने की जरूरत होती है. अगर इस गले की दर्द की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आप कनकासव का सेवन कर सकते हैं.

* दमा को हम कई नामों से जानते हैं. कुछ लोग इसे अस्थमा के नाम से भी जानते हैं. यह एक तरह की इन्फ्लेमेटरी बीमारी है जो हमारे फेफड़ों के वायु मार्ग में होने वाली बीमारी है, यह समस्या होने पर हमें साँस लेने एक दिक्कत होती है. दम्मा या अस्थमा होने पर हमारी वायु मार्ग में सूजन जाती है जिसके बाद हमारे वायु मार्ग में बलगम जमुना शुरू हो जाता है. अस्थमा होने पर हमें बहुत खांसी होती है. खांसी की वजह से हमारे सीने में जकड़न की समस्या भी होने लगती है. अगर अस्थमा का इलाज शुरुआती दौर में ना हो तो यह गंभीर रूप धारण कर लेती है और सांस रुकने तक की नौबत आने लगती है. ऐसे में कनकासव का उपयोग किया जा सकता है.

  • यह छाती में जमे हुए कफ और इन्फेक्शन को दूर करने की सबसे कारगर और सर्वश्रेष्ट औषधि है.
कनकासव के नुकसान-
यह तो हम अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी चीज का उपयोग सही तरीके एवं सही मात्रा में नहीं किया जाए तो यह हमारे सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है ?
* कनकासव का सेवन न्यून मात्रा में करना चाहिए. अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से इसकी लत लग सकती है. इसके अलावा और भी कई समस्या उत्पन्न कर सकती है जैसे- सिर दर्द, जी मिचलाना, उल्टी एवं बेचैनी जैसी अन्य कई समस्या हो सकती है. इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन की समस्या भी हो सकती है.
* कनकासव का सेवन स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसको बनाने में कुछ नशीली पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे इन महिलाओं नुकसान हो सकता है.
* जिन लोगों को पीत की समस्या है उन्हें भी इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से पेट की समस्या बढ़ सकती है. अगर जरूरी है तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क करने के बाद ही इसका सेवन करें.
* बच्चों को कनकासव का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बच्चों को इसकी लत भी लग सकती है. इसलिए इसका सेवन हमेशा डॉक्टर की देखरेख में ही करना चाहिए.
नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले योग्य के डॉक्टर की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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