शतावर्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

शतावर्यादि चूर्ण बनाने के लिए जड़ी- बूटियों की आवश्यकता होगी. शतावर्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे.

गोखरू के बीज- 50 ग्राम.

सफेद मूसली- 50 ग्राम.

कौंच के बीज (छिलका रोहित)- 50 ग्राम.

असगंध- 50 ग्राम.

शतावर- 50 ग्राम.

उपर्युक्त सभी जड़ी बूटियों को कूट पीस कर कपड़े छान चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें.

शतावर्यादि चूर्ण के उपयोग एवं फायदे-

मात्रा- 3 से 6 ग्राम तक रात को सोने से एक घंटा पहले और सुबह चीनी मिले दूध के साथ सेवन करें.

  • शतावर्यादि चूर्ण पौष्टिक है. श्रेष्ठ वाजीकरण और उत्तम वीर्य वर्धक है. इस चूर्ण के सेवन से रस, रक्तादि सभी धातुओं की क्रमशः वृद्धि होती है. इसके सेवन काल में ब्रह्मचर्य रहने से शरीर में बल और पुरुष शक्ति की बढ़ोतरी होती है यानी निर्दोष वीर्य का निर्माण होता है.
  • यह सभी प्रकार के वीर्य दोषों को दूर करता है जैसे- वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, शुक्र बहिनी नालियों की शिथिलता आदि ठीक हो जाते हैं.
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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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