रक्तगिल चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

रक्तगिल चूर्ण बनाने के लिए जड़ी- बूटियों की आवश्यकता होगी.

हीरा दक्षिणी- 10 ग्राम.

माजूफल- 10 ग्राम.

शुद्ध फिटकरी- 10 ग्राम.

काला सुरमा- 10 ग्राम.

गुलाब जल में पिसा हुआ अनार का फूल- 10 ग्राम.

गिलोय का सत्व- 10 ग्राम.

सभी को कूट पीसकर कपड़े छान चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें.

रक्तगिल चूर्ण के उपयोग एवं फायदे-

मात्रा- 1/2 से 2 ग्राम दिन में दो-तीन बार पानी के साथ सेवन करें.

रक्तगिल चूर्ण के फायदे-

  • यह चूर्ण शरीर के किसी भी हिस्से से बहते हुए रक्त को शीघ्र ही बंद करता है.
  • रक्तपित्त को दूर करता है.
  • खूनी बवासीर में इसके सेवन से रक्त आना बंद हो जाता है.
  • पेचिश ( रक्तातिसार ) में इसके सेवन खून आना बंद हो जाता है और शीघ्र ही ठीक होता है.
  • टीबी या रक्तबमन में भी इसके सेवन से रक्त आना बंद हो जाता है.
रक्तगिल चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे
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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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