त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

हेल्थ डेस्क- आयुर्वेद चिकित्सा का इतिहास 5000 वर्षों से अधिक पुराना है. सदियों से आयुर्वेदिक उपचार में औषधीय गुण रखने वाली जड़ी- बूटियों का प्रयोग किया जाता रहा है. त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे. इन्हीं जड़ी- बूटियों में से एक है त्रिफला. आयुर्वेदिक औषधियों की बात जहां होती है वहां पर त्रिफला का नाम जरूर आता है और अगर आप भी आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो आपको त्रिफला के बारे हो सकता है पता हो.

त्रिफला या त्रिफला चूर्ण में एक हर्बल मिश्रण है. जिसे एक से अधिक जड़ी- बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. चरक संहिता में भी त्रिफला के स्वास्थ्यवर्धक गुणों के बारे में बताया गया है. त्रिफला चूर्ण आंवला, विभितकी और हरीतकी के मिश्रण से तैयार किया गया है. यह आयुर्वेदिक मिश्रण अनेक रोगों के इलाज एवं बचाव में मददगार होता है.

आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला को शरीर में त्रिदोष यानी वात, पीत और कफ को संतुलित करने के लिए जाना जाता है. त्रिफला पांच प्रकार के रस का स्वाद से युक्त होता है. इसका स्वाद मीठा, खट्टा, कसैला, कड़वा और तीखा होता है. त्रिफला में केवल नमकीन स्वाद नहीं होता है.

त्रिफला निम्न जड़ी बूटियों का मिश्रण से तैयार किया जाता है.

1 .आंवला-

आंवला पूरे देश में उपलब्ध सबसे सामान्य फलों में से एक है. इसे भारत में आमलकी के नाम से जाना जाता है. इसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं और दुनिया भर में इसे विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है. आंवले के सेवन से पेट दुरुस्त रहता है और कब्ज की समस्या दूर रहती है. आंवला संक्रमण से लड़ने में मदद करता है एवं एक एंटी एजिंग फल के रूप में भी प्रसिद्ध है इसलिए यह त्वचा से जुडी समस्याओं को दूर करती है.

2 .विभितकी ( बहेड़ा )-

विभितकी का पेड़ पूरे भारतीय महाद्वीप में पाया जाता है. चिकित्सकीय प्रणाली और आयुर्वेद में भी दर्द निवारक, एंटीऑक्सीडेंट और लीवर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए मददगार माना गया है. स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के इलाज में भी लाभकारी है एवं इसमें डायबिटीज को रोकने के गुण भी मौजूद होते हैं. आयुर्वेद के अनुसार विभितकी में कई जैविक योगिक है जैसे कि ग्लूकोसाइट, टैनिन, गैलिक एसिड, इथाइल गैलेट आदि. इन यौगिकों के शामिल होने के कारण स्वास्थ्य के लिए यह काफी लाभदायक माना जाता है.

3 .हरीतकी ( हरे )-

आयुर्वेद में हररीतकी बहुत ही महत्वपूर्ण जड़ी- बूटियों में से एक है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और बढ़ती उम्र को रोकने के गुण मौजूद होते हैं. साथ ही हरीतकी घाव को ठीक करने में भी मददगार होता है. यह लीवर को सामान्य रूप से कार्य करने में मदद करती है. आयुर्वेद में इसे पेट, ह्रदय और मूत्राशय के लिए भी लाभदायक माना गया है. यहां तक कि इसे औषधियों का राजा भी कहा जाता है. हरीतकी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं.

त्रिफला या त्रिफला चूर्ण को आयुर्वेद में कायाकल्प करने वाली जड़ी- बूटियों के मिश्रण के रूप में जाना जाता है. लेकिन त्रिफला का उपयोग कई रोगों के उपचार में भी किया जाता है. वास्तव में आयुर्वेद में यह माना जाता है कि त्रिफला चूर्ण आपके शरीर की देखभाल ऐसे करता है जैसे कि आपकी अपनी मां आपकी देखभाल करेगी यानी त्रिफला चूर्ण की नियमित सेवन करने से वात, पित्त और कफ सामान्य रूप से शरीर में रहते हैं जो आपको निरोग बनाए रखने में मददगार होते हैं.

त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए इन 3 फलों की जरूरत होगी.

1 . हरीतकी ( हरड़ ) का छिलका- 100 ग्राम.

2 . विभितकी ( बहेड़े ) का छिलका- 100 ग्राम.

3 . आमलकी ( आंवला )- 100 ग्राम ( गुठली निकाला हुआ).

इन तीनों फलो को अच्छी तरह से धूप में सुखाकर पीसकर कपड़े छानकर चूर्ण को सुरक्षित रखें.

त्रिफला चूर्ण के उपयोग एवं फायदे-

मात्रा- 3 से 9 ग्राम तक रात को सोते समय गर्म पानी या दूध के साथ सेवन करना लाभदायक होता है.

त्रिफला चूर्ण के फायदे-

त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे
  • त्रिफला चूर्ण उत्तम रसायन एवं मृदु विरेचक है. त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करने से बीसों प्रकार के प्रमेह रोग, मूत्र का अधिक आना, मूत्र में गंधलापन होना, शोथ, पांडु रोग और विषम ज्वर नष्ट होता है.
  • त्रिफला चूर्ण अग्नीप्रदिपक, कफ, पीत, कुष्ट और बलिपलित नाशक है. इस चूर्ण को रात्रि में गर्म जल या दूध के साथ सेवन करने से सुबह दस्त खुलकर आता है.
  • विषम भाग शहद और घी के साथ त्रिफला चूर्ण के सेवन से नेत्र रोग में अच्छा लाभ होता है.
  • शुद्ध गंधक और शहद के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के रक्त विकार और चर्म रोग जड़ से खत्म हो जाते हैं.
  • त्रिफला चूर्ण के सेवन दिमाग की व्यर्थ गर्मी दूर होती है और दिमाग को ताकत मिलता है.
  • दो चम्मच त्रिफला चूर्ण को 1 लीटर पानी में रात को भिगोकर छोड़ दें, सुबह उस पानी को छानकर आंखों पर छींटे लगाएं. इससे नेत्र रोग दूर होते हैं.
  • त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

    प्रतिदिन रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से शोथ कम होकर मोटापा कम करने में मदद मिलती है.

  • आप कोई मुश्किल डाइट या एक्सरसाइज किए बिना अगर वजन कम करना चाहते हैं तो उसके लिए त्रिफला बहुत अच्छा विकल्प है. अधिकतर संशोधित और पैक किए जाने वाले खाद्य पदार्थों को पचाना मुश्किल होता है और वह पाचन तंत्र में मूल रूप से निचले आंत के कुछ हिस्सों में फंस जाते हैं और पाचन तंत्र के काम करने की क्षमता को कमजोर बना देते हैं. इसलिए अगर आपके पाचन तंत्र में समस्या है जिसकी वजह से आप अक्सर भूखा महसूस करते हैं और अधिक खाते हैं तो यह आपके वजन बढ़ने का मुख्य वजह हो सकता है. त्रिफला आपके शरीर में बड़ी आंत के एक अंग कोलन के लिए लाभदायक होता है. त्रिफला कॉलम के ऊतकों को मजबूत करता है और उसे साफ रखता है जिससे वजन को कम करने में मदद मिलती है.

इतना ही नहीं त्रिफला आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को आसानी से निकालता है और इन्हीं वजहों के कारण यह अतिरिक्त फैट और मोटापे को कम करने में मददगार होता है. इसलिए यदि आप वजन को कम करना चाहते हैं तो त्रिफला बहुत ही अच्छा विकल्प है.

  • त्रिफला चूर्ण कई त्वचा से संबंधित समस्याओं को दूर कर सकता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक भी लाता है. यह मृत कोशिकाओं को हटाता है और छिद्रों को साफ करता है और आपके खून को भी साफ करता है जिससे आपके चेहरे पर एक प्राकृतिक चमक आती है. आप इससे त्वचा के चकत्ते, किसी भी प्रकार के निशान, मुंहासे या सनबर्न का इलाज करने में उपयोग कर सकते हैं.

त्रिफला अपने रक्तशोधक गुणों के कारण त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. यह त्वचा की रंगत में निखारता है. यह त्वचा से दूषित पदार्थों को हटाता है तथा इसमें आंवला होने के कारण यह कोलेजन के निर्माण में भी मददगार करता है. बहेड़ा त्वचा पिगमेंटेशन में सहयोग करता है. शहद के साथ इसका इस्तेमाल करने त्वचा से संबंधित समस्याएं दूर हो जाती है.

इतना ही नहीं इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होने के कारण त्वचा के स्वास्थ्य को सुधारता है. विटामिन सी त्वचा पर झुर्रियां रोकने में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है. यह त्वचा के रूखेपन को ही खत्म करता है.

  • त्रिफला बालों के झड़ने, बालों का पतला होना और गंजेपन की समस्याओं के लिए भी अच्छा है. इसमें ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो आपके बालों के रोम के अंदर असर करके आपके बालों का विकास कर सकते हैं. बालों के विकास के लिए त्रिफला के 2 कैप्सूल का उपयोग करें. इसके अलावा सप्ताह में 2 बार मालिश करने के लिए त्रिफला तेल का उपयोग करें.

त्रिफला अपने रक्तशोधक गुणों के कारण बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होने के कारण यह बालों के स्वास्थ्य को भी सुधारता है. आंवला होने के कारण त्रिफला बालों को काला रखने में भी मददगार होता है. इसके लिए त्रिफला के पेस्ट को बालों में लगा लें और आधे घंटे बाद बालों को धो लें. ऐसा करने से बाल मजबूत होते हैं और जल्दी सफेद भी नहीं होते हैं. बालों को झड़ने से रोकने के लिए त्रिफला चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा लेकर 125 मिलीग्राम लौह भस्म मिलाकर सेवन करें.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह एक बार जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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