स्वास्थ्य के साथ ही सुंदरता बढ़ाने के लिए अमृत समान गुणकारी है शहद, जाने इस्तेमाल करने के तरीके एवं फायदे

हेल्थ डेस्क- शहद का इस्तेमाल सदियों से घरेलू एवं आयुर्वेदिक नुस्खों के रूप में किया जाता रहा है. शहद का उचित मात्रा में इस्तेमाल करने से शरीर स्वस्थ, बलवान, स्फूर्तिवान और सुंदर बनता है. शहद चिपचिपा, मीठा एवं स्वादिष्ट तरल पदार्थ है जो मधुमक्खियों के द्वारा तैयार किया जाता है. नियमित रूप से शुद्ध शहद का सेवन न सिर्फ स्वास्थ्य को बेहतर रहता है बल्कि उम्र भी लंबी करने में मददगार होता है.

स्वास्थ्य के साथ ही सुंदरता बढ़ाने के लिए अमृत समान गुणकारी है शहद, जाने इस्तेमाल करने के तरीके एवं फायदे

आयुर्वेद के अनुसार शहद में कई प्रकार के औषधीय गुण मौजूद होते हैं जिसके कारण शहद को विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है. प्राचीन काल से शहद का उपयोग घरेलू एवं आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है. कई आयुर्वेदिक औषधियों को बनाने में भी शहद का इस्तेमाल किया जाता है.

शहद में पाए जाने वाले पोषक तत्व-

शहर में कैलोरी, शुगर, जिंक, सेलेनियम, कार्बोहाइड्रेट, मैग्निशियम, कैलशियम, विटामिन सी, कोलिन, फास्फोरस, नियासिन, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी6, एमिनो एसिड इत्यादि पोषक तत्व पाए जाते हैं.

शहद के फायदे-

1 .शहद के इस्तेमाल से कीमोथेरेपी के दौरान काफी मदद मिलती है. कीमोथेरेपी एक ऐसा उपचार है जिससे शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को खत्म किया जाता है. शहद कीमोथेरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को कम होने से रोकने में मदद करता है. कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को प्रतिदिन दो चम्मच शहद का सेवन करना काफी लाभदायक होता है.

2 .आयुर्वेद की दृष्टि से शहद त्वचा के लिए काफी लाभदायक होता है. शहद न केवल गंभीर बीमारियों से दूर रखता है बल्कि इसके इस्तेमाल से त्वचा खूब सुंदर भी बनाया जा सकता है. शहद के उपयोग से चेहरे की चमक बढ़ती है. जिससे चेहरे के दाग- धब्बों की समस्या दूर होती है. कई सौन्दर्य उत्पादों में शहद का उपयोग किया जाता है. जिसका इस्तेमाल करने से चेहरे की चमक बरकरार रहती है.

गर्भवती महिलाओं को बवासीर रोग होने के कारण, लक्षण और शर्तिया आयुर्वेदिक उपाय एवं बचाव के तरीके

3 .शहद का इस्तेमाल लो ब्लड प्रेशर की समस्या छुटकारा पाने में भी मदद करता है. लो ब्लड प्रेशर की समस्या में दिमाग में ऑक्सीजन कम मात्रा में पहुंचता है जिससे बार-बार चक्कर आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है. ऐसे में शहद का उपयोग शरीर में रक्त परिसंचरण तंत्र का संतुलन बनाए रखता है. जिससे न्यून रक्तचाप की समस्या से छुटकारा मिलता है.

जानिए- 20 प्रकार के योनि रोगों के लक्षण और उसकी चिकित्सा

4 .शहद के इस्तेमाल से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बरसात एवं गर्मियों के मौसम में अक्सर बच्चे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं. जिससे उन्हें दस्त एवं अन्य पेट संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. आयुर्वेद के मुताबिक बच्चों को दस्त जैसी समस्या होने पर शहद चटाने से बहुत लाभ मिलता है. इससे बच्चे को तुरंत एनर्जी भी मिलती है.

5 .शहद के सेवन से पाचन तंत्र भी ठीक रहता है. आयुर्वेद के अनुसार शहद के सेवन से पेट में पाचन अग्नि बढती है. जिससे पेट संबंधी विकारों से छुटकारा मिलता है. शहद के इस्तेमाल से पेट में कब्ज, गैस, एसिडिटी की समस्या से भी छुटकारा मिलती है.

6 .शहद का इस्तेमाल सर्दी- जुकाम, खांसी एवं कफ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी किया जाता है. शहद की तासीर गर्म होती है जिससे इन सभी समस्याओं से जल्द छुटकारा पाया जा सकता है. शहद गले में जमा हुए कफ को टुकड़े-टुकड़े करके बाहर निकालने में काफी गुणकारी है. इसके साथ- साथ खांसी एवं सर्दी- जुकाम की समस्या से भी छुटकारा मिलती है.

7 .शहद के सेवन से भूख भी बढ़ती है. अक्सर लोगों को भूख न लगने की समस्या हो जाती है. जिसके वजह से कमजोरी एवं अन्य बीमारियां होने का खतरा अधिक हो जाता है. लेकिन नियमित रूप से शहद का सेवन किया जाए तो भूख अच्छी लगने लगती है और शहद शरीर को एनर्जी भी प्रदान करता है जिससे शरीर को ताकत मिलती है.

8 .शहद के इस्तेमाल से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. जिससे शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है. अक्सर खाने का कुछ हिस्सा पेट में पूरी तरह से पच नहीं पाता है. जिससे शरीर में हानिकारक विषैले पदार्थ जमा हो जाते हैं. ऐसे में शहद के उपयोग से इन विषैले पदार्थों को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है. जिससे स्वस्थ शरीर रहता है.

9 .शहद का नियमित सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मददगार होता है. जिससे कई बीमारियों संक्रमण का खतरा कम हो जाता है. शहद के इस्तेमाल से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्या दूर हो जाती है. क्योंकि शहद में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जिसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है.

10 .शहद के उपयोग से घाव भी जल्दी भर जाते हैं. शहद में जीवाणु विरोधी गुण मौजूद होते हैं. इसे त्वचा पर लगाने से जल्दी ठीक हो जाती है. साथ ही त्वचा को कोमल बनाने में भी काफी मददगार होता है. जिससे त्वचा का निर्माण होता है घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं.

11 .मोटापा को कम करने में शहद काफी मददगार होता है. प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी में घोलकर एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीना वजन घटाने में काफी लाभदायक होता है.

12 .खून को स्वस्थ और साफ रखने के लिए भी शहद का सेवन लाभकारी है. इसके लिए शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पीना सबसे अच्छा उपाय है. यह रक्त कोशिकाओं की संख्या पर असर डालता है और खून में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है.

13 .मुहांसों की समस्या से परेशान लोगों के लिए शहद काफी मददगार बन सकता है. इसमें मौजूद सुक्रोज और जयलोज वाटर एक्टिविटी को कम करने में मदद करते हैं जिससे बैक्टीरिया नहीं बढ़ते हैं. इस वजह से मुहांसों से राहत पाने के लिए आपको शहद का इस्तेमाल करना लाभदायक हो सकता है. इसके लिए आप एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी में घोलकर प्रतिदिन पिएं एवं मुहांसों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. इसके बाद साफ पानी से चेहरा धो लें.

14 .अनिद्रा की समस्या हो तो शहद काफी मददगार भी साबित हो सकता है. यदि दूध के साथ शहद का सेवन रात को सोने से थोड़ी देर पहले किया जाए तो इससे स्लीपिंग हार्मोन की बढ़ोतरी होती है. जिससे नींद अच्छी आती है.

शहद सेवन करने का तरीका-

प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक चम्मच शहद का सेवन कर सकते हैं. इसे सिरप, सलाद, ड्रेसिंग के रूप में, चीनी के विकल्प के रूप में, आम के जूस में मिलाकर, चाय में डालकर, एक गिलास दूध में मिलाकर एवं हल्की गुनगुने पानी में मिलाकर सेवन किया जा सकता है.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

इसे भी पढ़ें-

सारस्वतारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

बाजीकरण चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अश्वगंधादि चूर्ण बनाने की विधि उपयोग एवं फायदे

शतावर्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

शतपत्रादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

लवण भास्कर चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अमृतारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

गंधक रसायन चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

महामंजिष्ठादि क्वाथ बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

योगराज और महायोगराज गुग्गुल बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

आयुर्वेद के अनुसार किस ऋतु में कौन सा पदार्थ खाना स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है, जानें विस्तार से

ब्रेन ट्यूमर होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

श्रीखंड चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

ब्राह्मी चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

बिल्वादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

तालीसादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

सितोपलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

दाड़िमपुष्प चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग और फायदे

मुंहासे दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय

सफेद बालों को काला करने के आयुर्वेदिक उपाय

गंजे सिर पर बाल उगाने के आयुर्वेदिक उपाय

कर्पूरासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

वासासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

मृगमदासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

द्राक्षासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अर्जुनारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

खदिरारिष्ट बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

चंदनासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

महारास्नादि क्वाथ बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

रक्तगिल चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

नारसिंह चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

कामदेव चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

शकाकलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

विदारीकंदादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

प्रद्रांतक चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

माजूफलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

मुसल्यादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

सारिवादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

कंकोलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

प्रवालादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

जातिफलादि चूर्ण बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

अद्रकासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

लोहासव बनाने की विधि, उपयोग एवं फायदे

औषधि प्रयोग के लिए पेड़- पौधों से कब लेना चाहिए फल, फूल, छाल, पत्ते व जड़ी- बूटियां ?

दिल की धड़कन रोग क्या है ? जाने कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

अपतानिका ( Tetany ) रोग क्या है? जानें कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

शरीर की कमजोरी, थकान, खून की कमी दूर कर मर्दाना ताकत को बेहतर बढ़ाती है ये 12 चीजें

मर्दाना कमजोरी दूर करने के लिए बेहतर उपाय है किशमिश और शहद का ये नुस्खा, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

जाड़े में कमर और जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण है मेथी का लड्डू, जाने बनाने की विधि

श्वेत प्रदर रोग होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार

Share on:

मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

Leave a Comment