योनि का बाहर निकलने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

हेल्थ डेस्क- इस रोग में योनि की आंतरिक श्लेष्मिककला ढीली हो जाती है और वह अपने स्थान से पृथक हो जाती है. जिससे योनि के छेद का कुछ अंश बाहर निकल आता है. संयोग बस दुर्घटना आदि से संपूर्ण योनि की रचना ही बाहर आ जाती है.

योनि का बाहर निकलने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

योनि के बाहर निकलने के कारण-

अत्यधिक शारीरिक संबंध बनाना, शारीरिक संबंध के प्रति हमेशा उत्तेजित रहना, एक बार में कई मर्दों के साथ संबंध बनाना, महिला का योनि में किसी चीज को डाल लेना, महिला को ज्यादा मात्रा में सप्लीमेंट का सेवन करना, महिला को कम उम्र में ज्यादा सम्भोग करना और बच्चे को जन्म देना, महिला की योनि में संक्रमण, इन्फेक्शन, घाव आदि होना, योनि में चोट लगना, अधिक हस्तमैथून करना, अधिक मात्रा में ज्यादा दिनों तक योनि स्राव अथवा प्रदर के आते रहने से, शारीरिक कमजोरी, प्रसव काल में अभिघात, बार-बार संतान को जन्म देना, प्रसव के समय कष्ट, प्रसव के अनंतर अधिक काल तक विश्राम का अभाव, दीर्घकालिक मलावरोध ( कब्ज ) पेशाब के वेग को रोके रखने की आदत, जल्दी-जल्दी गर्भधारण, योनि की दीवारों की शिथिलता, स्वस्तिक संदंश का अनुचित उपयोग, रजोनिवृत्ति की अवस्था में योनि के आधारभूत धातु की शिथिलता आदि इसके कारण हैं.

इसके अतिरिक्त Endo-pelvic fascia का दुर्बल होना भी इसका एक मुख्य कारण है. यह fascia योनि के पूर्व की भीति का आधार है. शारीरिक दुर्बलता तथा प्रसव काल में तनाव एवं अभिघात से यह कमजोर और शिथिल हो जाता है जिससे योनि के पूर्व भित्ति का भ्रम हो जाता है. महिला द्वारा पौष्टिक चीजों का सेवन नही करना भी इस रोग का सहायक कारन हो सकता है.

इस रोग के सहायक कारणों में प्रसव कालीन अस्वाभाविकता भी अपना कुछ स्थान रखती है. विशेष रूप से प्रीनियल बॉडी का प्रसवकाल में घाव युक्त होना, बर्थ केनल से बड़े आकार के शिशु का जन्म, दु:स्वास्थ्य एवं ग्लानि अथवा जल्दी-जल्दी गर्भ स्थिति मनोदौर्बल्य आदि इसके कारण है.

योनि बाहर निकलने के लक्षण-

महिला की योनि में असुविधा तथा कमजोरी प्रतीत होती है साथ ही भग के समीप उभार जैसा प्रतीत होता है. महिला के खांसने तथा जोर लगाने से उसकी वृद्धि होती है. महिला को कटिशूल ( पेल्विक पेन ) की अनुभूति होती है. जब केवल योनि की म्यूकस मेंब्रेन ही अपने स्थान से बाहर आती है तो महिला की योनि के अंदर खिंचाव जैसा महसूस होता है साथ ही योनि में डॉट की भांति कोमल गोल वस्तु फंसी हुई दिखाई देती है. इसका रंग गुलाबी अथवा गहरा लाल होता है. महिला को चलने- फिरने तथा मूत्र त्याग में विशेष कष्ट होता है. योनि के प्रनत होने से स्राव आता है. कुछ दिनों के बाद इन कष्टों में कमी आ जाती है.

जब योनि की संपूर्ण रचना बाहर आ जाती है तो महिला की काँच भी बाहर निकल आती है. इस समय महिला को काटने जैसा दर्द होता है साथ ही ऐसा प्रतीत होता है मानो गुदा एवं योनि के मध्य का स्थान फटा जा रहा है. यदि योनि के सामने वाली दीवार निकल कर बाहर निकल आती है तो उसके साथ मूत्राशय में भी खिंचाव पैदा हो जाती है. ऐसी अवस्था में महिला को बार- बार थोड़ा-थोड़ा पेशाब आता है जो महिला को विशेष कष्ट पहुंचाता है. यदि योनि की पिछली दीवार बाहर निकल आती है तो गुदा में भी गिरावट पैदा हो जाती है जिसके परिणाम स्वरूप महिला को मल त्याग के समय अतिशय कष्ट का सामना करना पड़ता है. यदि किसी कारण से दोनों भाग बाहर आ जाती है तो पेशाब एवं मल त्याग दोनों में ही अधिक कष्ट होता है. इसके साथ-साथ महिला के चूतड़ों, जांघों तथा पिंडलियों में काफी दर्द होता है.

पूर्णभ्रंश की स्थिति में योनि का अधिक अंश बाहर निकल जाने पर महिला के दैनिक कार्यों में काफी असुविधा होती है साथ ही रगड़ या अभिघात से घाव होने की अधिक संभावना रहती है. इसके अतिरिक्त रक्तस्राव, अतिआर्तव या अनियमित मासिक धर्म की संभावना अधिक हो जाती है.

योनि का बाहर निकलने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

योनि को अंदर करने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय-

1 .महिला को पूर्ण विश्राम दें. महिला चिकित्सक को चाहिए कि वह अपने हाथों को विसंक्रमित घोलों से धोकर साफ कर कर ले इसके बाद अंगुलियों की सहायता से योनि के बाहर निकले हुए भाग को धीरे-धीरे पीछे हटाकर यथा स्थान पहुंचा दें. इसके बाद योनि का डूश करें. इसके लिए 8 ग्राम फिटकरी 1 लीटर पानी में घोलकर फिल्टर कर ले और योनि के अंदर पहुचाए. इससे मांसपेशियों में कसाव आकर वह बाहर नही निकलेगा.

2 .महिला को 10-15 दिन तक नित्य ठंडे पानी के टब में नग्न अवस्था में बैठाए. इस क्रिया से योनि यथा स्थान चली जाती है. योनि फिर बाहर न निकले इसके लिए महिला को ताकत पहुंचाने वाली औषधियों तथा पौष्टिक आहार देना चाहिए.

3 .कत्था, हरीतकी, जायफल, नीम की पत्ती एवं सुपारी इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें और पोटली बना लें. इस पोटली को आकार के अनुसार प्रतिदिन योनि में रखें. इससे योनि संकुचित हो जाती है और बाहर नहीं निकलती है.

4 .झिल्ली के दुर्बल होने के कारण योनि के पुनः बाहर आने की संभावना रहती है. इसलिए पौष्टिक औषधी तथा पौष्टिक आहार का सेवन कराना चाहिए.

5 .10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह- शाम महिला को सुपारी पाक दूध के साथ सेवन कराना चाहिए. इससे शरीर के समस्त अंगों को ताकत मिलने के साथ ही योनि भाग को भी ताकत मिलता है और योनि संकुचित होता है. जिससे योनि भाग बाहर नहीं निकल पाता है.

विशेष ज्ञातव्य- रोग के ठीक हो जाने के बाद महिला को अधिक परिश्रम नहीं करना चाहिए. उसे अधिक चलने- फिरने से भी बचाया जाना चाहिए. महिला को भविष्य में अधिक भार वाली वास्तु उठाने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से फिर से योनि भाग बाहर निकल सकती है.

नोट– यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. अधिक जानकारी एवं किसी भी प्रयोग से पहले योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

स्रोत- स्त्री रोग चिकित्सा पुस्तक.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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