बच्चों को सुखंडी ( सुखा ) रोग होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

रोग परिचय- सूखा रोग, सुखंडी, रिकेट्स- जब सूखा रोग बच्चों में हो जाता है तो बच्चे दिन प्रतिदिन कमजोर होते चले जाते हैं. उनकी हड्डियां दिखाई देने लगती है. बच्चा हमेशा रोता, चिड़चिड़ाता रहता है. हालांकि सुखंडी रोग किसी भी उम्र के महिला व पुरुष को हो सकती है चाहे वह बच्चा हो या युवा हो या फिर बूढ़ा.

बच्चों को सुखंडी ( सुखा ) रोग होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

सुखंडी रोग होने के कारण-

सूखा रोग अधिक मार्ग चलने, उपवास अधिक रखने तथा क्षय अथवा वृद्धावस्था के कारण होता है. बालकों को सूखा रोग पौष्टिक भोजन नहीं मिलने के कारण से होता है. किसी भी व्यक्ति को अधिक दस्त होने से उलटी या बुखार आदि रोगों में लापरवाही करने से या छोटे बच्चों को बिल्ली लाँघ जाती है या सूंघ जावे तो सूखा रोग हो जाता है. सुखंडी रोग प्रायः 5 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों को अधिक होता है.

बच्चों में प्रायः ही गर्भवती माता के स्तन का दूध पीने से बच्चों को यह रोग होता है. फिर इससे ही खांसी, अग्निमान्ध, वमन, तन्द्रा, कृशता,अरुचि आदि रोगों की उत्पत्ति होती है. बच्चे का पेट बड़ा हो जाता है और पीछे का हिस्सा सूख जाता है. बच्चा खाता है फिर भी दिन प्रतिदिन सुखता चला जाता है.

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सुखंडी रोग के लक्षण-

शरीर सूखता जाता है. केवल हड्डियाँ ही देखने को मिलती है, जीर्ण ज्वर सदा रहे, कभी ताप अधिक हो जाता है तो कभी कम हो जाता है. किसी किसी का पेट बड़ा हो जाता है और हाथ पैर पतले हो जाते हैं. खांसी, उल्टी, पेचिश, चिड़चिड़ापन, बोलने में लड़खड़ाना होता है बच्चों का तालू नीचे दब जाए. हाथ लगाने से गढ़ा सा प्रतीत होता है और बच्चा अधिक रोता है. सुखंडी रोग में शरीर में चुने की मात्रा कम हो जाती है यानी कि शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है आंखें भी कमजोर हो जाती है.

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बच्चों में सुखंडी रोग दूर करने की आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार-

1 .सुखंडी रोग में अल्प मात्रा में अग्निमुख चूर्ण अच्छी दवा है. इससे बच्चे की अग्नि बढ़ेगी. शरीर सबल और पुष्ट होगा. रोग कठिन होने पर कुमार कल्याण रस देना अधिक फायदेमंद होता है.

2 .काली गाय का पेशाब सूर्य निकलने से पहले ले लें. ध्यान रहे गाय एकदम काली होनी चाहिए. अब एक सेर गाय के पेशाब में एक तोला असली कश्मीरी केसर पेशाब में ही पिसकर डाल दें और लुग्दी बना लें. फिर उसे उसी सेरभर पेशाब मे डाल दें और छानकर साफ की हुई शीशी में रख लें.

मात्रा- 6 महीने के बच्चे को चार बूंद, 6 महीने से ऊपर वाले बच्चे को 8 बूंद बराबर मात्रा मां के दूध में मिलाकर सुबह, दोपहर, शाम को देते रहें. यह दवा सुखंडी रोग में विशेष फायदेमंद है. 3 दिन में ही सुखा रोग दूर हो जाता है.

3 .एक मिट्टी के पात्र में पानी भरे और उसमें थोड़ा कली का चूना डाल दें, चूना डालने से पानी उबलने लगेगा. दूसरे दिन उस पात्र के ऊपर का साफ जल दूध में मिलाकर शिशु को पिलायें. 1-2 तोला जल दिन में दो बार पिलाना चाहिए.

4 .शिशु को धूप में रखकर कड़वे तेल की मालिश करें. यदि मछली के तेल की मालिश की जाए तो अधिक फायदेमंद होता है.

5 .सुखंडी रोग में दूध के साथ अंडे का सेवन करना फायदेमंद होता है.

6 .1 से 4 घोंघा ( शंख ) पानी में अच्छी तरह से मंद आंच में पकाकर पिलाने से सुखंडी रोग में अति शीघ्र लाभ होता है.

7 .घेसे ( बरसात में जमीन के अंदर से निकलने वाले एक बालिश्त के लंबे कथई कीड़े ) का सेवन भी सूखंडी रोग दूर करने में लाभदायक है.

8 .100 ग्राम तुलसी की पत्ती, 5 ग्राम काली मिर्च का पाउडर और स्वादानुसार साल भर पुराना गुड़ को 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें. उबलते- उबलते जब पानी आधा रह जाए तो इसे आंच से उतारकर 100 मिलीलीटर चूने का पानी मिलाकर फिर से उबालें. जब पानी 100 मिलीलीटर रह जाए तो इसे अच्छी तरह से छानकर शीशी में भरकर रख लें. अब इस पानी में से 5 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम बच्चे को सेवन कराएं. इसके नियमित सेवन करने से पुराने से पुराना सूखा रोग ठीक हो जाता है यह आजमाया हुआ नुस्खा है.

चूने का पानी बनाने की विधि- 25 ग्राम खाने का चुना और 150 ग्राम पानी को किसी मिट्टी के बर्तन में घोलकर रख दें और 48 घंटे बाद जब चुना अच्छी तरह से नीचे बैठ जाए तो पानी को निकाल ले यही चूने का पानी है.

9 .पीपल 25 ग्राम, अतीस 25 ग्राम, नागर मोथा 25 ग्राम और काकड़ासिंगी 25 ग्राम को पीसकर चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें अब इस चूर्ण में से चुटकी भर लेकर शहद के साथ बच्चे को खिलने से बुखार, अतिसार, खांसी तथा सूखा रोग में अच्छा लाभ होता है.

10 .अंगूर का रस बच्चे को पिलाने से सुखंडी में अच्छा लाभ होता है. यदि अंगूर का रस और टमाटर का रस मिलकर पिलाया जाए तो बच्चा को सुखंडी रोग से जल्दी छुटकारा मिलता है.

11 .दस्त अधिक हो रहे हो तो कर्पुर वटी या जातिफलादि चूर्ण का सेवन कराएं. शंख भस्म, अभ्रक भस्म, कपर्दक भस्म, प्रवाल भस्म, मुक्ताशुक्ति भस्म, लावंगादी चूर्ण,प्रवलादी चूर्ण, दशमूलारिष्ट,लोहासव, द्राक्षासव,आदि का सेवन जरुरत के अनुसार सुखंडी रोग में सेवन कराना फायदेमंद होता है.

12 .शरीर को महालाक्षादी तेल से मालिस कराएं, खाने में पौष्टिक चीजों का सेवन कराये इससे सुखंडी रोग से जल्दी मुक्ति मिलती है.

13 .प्रवाल पंचामृत 1/2 ग्राम, सितोपलादी चूर्ण 1 ग्राम, गोदंती भस्म 1/2 ग्राम और स्वर्णवसंत मालती 1-1 गूंज सुबह- शाम शहद के साथ सेवन कराएं और च्वयनप्राश अवलेह 5-5 ग्राम अंशमणि वटी नंबर 1 एक- एक गोली दिन में 3 बार चूने के पानी के साथ सेवन कराएं.

14 बैगन को अच्छी तरह से पीसकर उसका रस निकाल कर उसमे थोड़ा सा सेंधा नमक मिला लें. अब इस रस को एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन दोपहर के भोजन के बाद कुछ दिनों तक बच्चे को पिलाने से सूखा रोग में अच्छा लाभ होता है.

15 .सूखा रोग तथा यकृत वृद्धि में मुली की छोटी- छोटी टुकड़े काटकर नौसादर मिलाकर रख दें. सुबह उठने पर बच्चे को सुबह खाली पेट उस मुली को खिलाने से सूखा रोग में अच्छा लाभ होता है.

16 .सुबह सूरज उगने से पहले काली गाय का 10 मिलीलीटर पेशाब और 10 ग्राम केसर को गाय के पेशाब में मिलाकर शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें. अब इस में से 6 महीने तक के बच्चों को इसकी पांच बूंदें और उसके ऊपर की उम्र के बच्चों को 8 बूंदें सुबह -शाम मां के दूध के साथ देने से सूखा रोग जल्दी ठीक हो जाता है.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरुर लें. धन्यवाद.

स्रोत- आयुर्वेद ज्ञान गंगा.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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