अम्हौरी ( घमौरी ) होने के कारण, लक्षण और शर्तिया आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

हेल्थ डेस्क- अम्हौरी रोग गर्मी के दिनों में अधिक पसीने के निकलने के कारण हुआ करता है. इसको कभी-कभी लिचन ट्रॉपिकस कहते हैं. यह अक्सर लाल सागर के इर्द-गिर्द फारस भारतवर्ष का पठार तथा दक्षिणी अमेरिका में अधिक होता है. इसको अनेक नामों से जाना जाता है जैसे- धामपित, Lichen Tropicus, Lichen miliaria, Lichen rubra, Heat rash, अम्हौरी, गम्हौरी इत्यादि.

अम्हौरी ( घमौरी ) होने के कारण, लक्षण और शर्तिया आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

यह एक विशिष्ट ऋतु में होने वाला त्वक रोग है जिसमें श्वेद स्राव का अवरोध हो जाता है. हमारे देश ( भारत ) में यह ग्रीष्म एवं वर्षा ऋतु में होता है. व्यावसायिक अम्हौरी उन व्यक्तियों को होती है जिनका काम अधिक समय तक धूप में कार्य करने का होता है.

अम्हौरी ( घमौरी ) के लक्षण-

यह रोग त्वचा पर छोटे- छोटे लाल दाने के रूप में समस्त शरीर पर तथा विशेषता जिन स्थानों पर पसीना अधिक निकलता है जैसे- माथा, पीठ इत्यादि पर अधिक उग्र रूप से प्रकट होता है और किसी ठंडी जगह पर रहने तथा पंखे के नीचे कुछ समय तक ठहरने से नष्ट हो जाता है और यदि यह नष्ट ना हुआ तो कम से कम इसकी तेजी में अवश्य ही कम हो जाती है. जब यह पीती अपने उग्र रूप में हुआ करती है तो उसमें अत्यधिक जलन एवं खुजली पैदा होती है. माथा, सीना, पीठ, कक्षा, कांच इत्यादि स्थानों पर जहां पसीना मरता है वहां पर अम्हौरी अधिक मात्रा में होती है.

अम्हौरी ( घमौरी ) होने के कारण-

यह रोग श्वेद ग्रंथियों के मुख पर Keratinous Plugging के कारण होता है जो कि गौड़ बैक्टीरियल उपसर्ग के कारण उग्रतम हो जाता है. आधुनिक मतानुसार एक त्वचा की Sebaceous डिफिशिएंसी रोग है क्योंकि ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक श्वेदस्राव के कारण Sebum वह जाता है और इसी की कमी से श्वेद ग्रंथि का मुंह बंद हो जाता है. Miliaria rubra की उत्पत्ति त्वचा पर मिट्टी का तेल या नमक के पानी की कम्प्रेस करने से पैदा कराया जा सकता है. अत्यधिक मानसिक तनाव भी इसका एक प्रमुख कारण है.

अम्हौरी के प्रकार-

1 .Miliaria Crystalinna या Sudamina- इसमें त्वचा की स्ट्रैटम कॉर्नियम में स्वेदका संचय होता है.

2 .Miliaria alba- इसमें छोटे-छोटे भूरे रंग के पीप युक्त विस्फोट त्वचा पर दिखाई देते हैं.

3 .Miliaria rubra- इसमें बहिस्त्वक के बहुत ही भीतर स्वेद का संचार होता है. इसमें लाल चकत्ते या पीप जनित चकते मुख्य रूप से ढके स्थानों पर दिखाई देते हैं.

4 .Miliaria Pustulosa या Pustular Miliaria- इसमें अम्हौरी में पीप मिलता है जो कि सेकेंडरी बैक्टीरियल इनफेक्शन के परिणाम स्वरूप से होता है. इसमें भी बहिस्त्वाक पर श्वेद रहता है.

5 .Miliaria Profunda  या Tropical Anhidrosis- जब श्वेद अन्तस्त्वक पर रह जाता है इस प्रकार का बिना शोथ वाला लक्षण हीन  मांस के रंग के चकत्ते दिखलाई देते हैं.

6 .मिश्रित प्रकार- इसमें उपरोक्त किन्हीं दो प्रकार का मिश्रण है.

यह रोग मुख्य रूप से त्वचा की श्वेद ग्रंथियों के विकार के कारण हुआ करता है. पित्ती प्रायः कमजोर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, रोग ग्रस्त पुरुषों एवं महिलाओं में अधिक होता है. जिससे व्यक्ति बेचैन हो उठता है तथा निद्रानाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. शरीर को रोगी जितना खुजलाता है उतना ही चुनचुनाहट एवं जलन बढ़ती ही जाती है. कभी-कभी इसमें पीप जमा भी हो जाता है. रोगी त्वचा को खुजलाकर शरीर पर घाव पैदा कर लेता है. कोई भी उत्तेजक पदार्थ जिससे पसीना निकलने की अधिक संभावना को उसके सेवन से यह और तेजी से निकलता है. जैसे- चाय अथवा कॉफी के अधिक सेवन से इसकी उग्रावस्था में जब कि पसीना कम निकलता है तब रोगी को थकान, चक्कर, श्वासकष्ट तथा धड़कन मालूम होने लगती है. इस अवस्था को स्वीट रिटेंशन सिंड्रोम कहते हैं.

अम्हौरी ( घमौरी ) का आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय-

1 .रोगी को पूर्ण आराम देना चाहिए तथा उन सभी उत्तेजक पदार्थ जिनसे अधिक पसीना बनने की संभावना है का प्रयोग नहीं करना चाहिए. जैसे चाय, कॉफी, कसरत, गर्म स्थान पर रहना, अधिक परिश्रम करना इत्यादि. मोटे कपड़े पहनना तथा अधिक धूप में रहने से बचना चाहिए. फलालैन का त्वचा से साक्षात संपर्क नहीं होने देना चाहिए. एक तोलिया हमेशा अपने पास रखें, पसीना निकल उसे पोछें, पंखे का पसीना सुखाने के लिए प्रयोग तथा ढीले वस्त्रों को पहनना लाभदायक होता है.

2 .अम्हौरी से ग्रसित व्यक्ति को प्रतिदिन मेडिकेटेड नीम, सेवलोन, डिटॉल इत्यादि साबुन से नहाना लाभदायक होगा.

3 .चंदन घिसकर लगाना चाहिए. इससे ठंडक मिलती है और अम्हौरी की समस्या से राहत मिलेगी.

4 .आंवला का लेप बनाकर शारीर पर स्नान करने से थोड़ी देर पहले लगाने से अम्हौरी में अच्छा लाभ होता है.

5 .दही और चने का बेसन मिलाकर लेप करके अम्हौरी में स्न्नान करना लाभदायक होता है.

6 .नीम की पत्ती और सरसों का उबटन लगाने से पीत शांत होती है जिससे अम्हौरी में राहत मिलता है.

7 .धनिया का क्वाथ बनाकर मिश्री मिलाकर पिलाने से अम्हौरी में खुजली कम हो जाती है.

8 .सारिवाधारिष्ट, खदिरारिष्ट, उशिरासव, खस का शरबत, चंदन का शरबत, अनार और शहतूत का शरबत पीने से अम्हौरी से राहत मिलती है.

9 .घमौरिया जब बहुत अधिक परेशान कर रही है तो तुरंत राहत पाने के लिए 2-3 आइस क्यूब लें. इन्हें एक साथ सूती रुमाल में लपेटकर घमौरियों पर धीरे-धीरे हल्के हाथों से मसाज करें. इससे आपको घमौरियों की खुजली और जलन से तुरंत राहत मिलेगी. ऐसा आप दिन में दो तीन बार 5- 10 मिनट के लिए कर सकते हैं.

10 .घमौरियों की समस्या को दूर करने में पपीता भी आपकी मदद कर सकता है. इसके लिए आप पका पपीता और गेहूं का आटा लें दोनों को पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को हल्के हाथों से घमौरियों पर लगाएं और नहा लें. आप इसका उपयोग दिन में दो बार कर सकते हैं. रात को ऐसा करके नहाएंगे तो फिर नींद भी आपको अच्छी आएगी और घमौरियों के कारण त्वचा भी काली नहीं पड़ेगी.

11 .खीरे को छोटे-छोटे टुकड़े काटकर इसमें एक चम्मच चंदन का पाउडर मिला लें और इसे पीसकर पेस्ट तैयार कर लें और 20 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. अब इसे अम्हौरियों पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें. जब यह पेस्ट सूख जाए तो स्नान कर लें. इससे अम्हौरियां दूर होगी व तुरंत ठंडक मिलेगी और त्वचा भी चमकदार बनेगा.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उदेश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक कि सलाह जरुर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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