कमर दर्द ( कटि वेदना ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

हेल्थ डेस्क- कमर दर्द को कटि वेदना, कटिशूल, लो बैक पेन आदि नामों से जाना जाता है. इसे अंग्रेजी में Lumbago कहा जाता है.

यदि वातरोग कमर की पेशियों में हो जाए तो उसे कटिवात कहते हैं., कठोर परिश्रम सर्दी लगना, कब्ज एवं धातु की क्षीणता के कारण अकस्मात कमर में दर्द होने लगता है. जिससे झुकने, बैठने और मुड़ने पर दर्द अधिक हो जाता है.

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इस रोग में रोगी ना सीधा होकर बैठ सकता है और ना आराम से खड़ा हो सकता है. कमर दर्द भी सिर दर्द के समान एकदम कष्टदायक रोग है. यह एक अति सामान्य स्थिति है. अधिकांशतः केसों में कमर का दर्द त्वचा के नीचे तंतु उत्तकों या कटि क्षेत्र की प्रावरणी में तंतुशोथ होने के कारण होता है.

कमर दर्द ( कटि वेदना ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

कमर दर्द होने के क्या कारण हो सकते हैं ?

  • फ़्लू, गर्भाशय ग्रीवाशोथ.
  • टेबीस डोर्सेलीस.
  • स्पाइनल ट्यूमर.
  • पॉट्स डिजीज.
  • स्पोंडिलाइटिस.
  • मेनिनजाइटिस.
  • विसर्प.
  • हिस्टीरिया.
  • पानी में भीगना.
  • भारी वस्तु उठाना.
  • भारत में कमर दर्द के प्रमुख कारणों में तंतु शोथ, अंतः कशेरुका डिस्क का हर्निया, अस्थिसुषिरता, अस्थि संधि शोथ और कशेरूका यक्ष्मा के नाम उल्लेखनीय है. महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान कमर के दर्द का सबसे प्रमुख कारण अस्थि सुषिरता होती है. बुढ़ापे में कशेरुका संधियों का अस्थि संधि शोथ सबसे प्रमुख कारण होता है. बच्चों में या किशोरावस्था में कशेरुका यक्ष्मा के विषय में विचार करना चाहिए.

उपर्युक्त कारणों से यह रोग अचानक पैदा हो जाता है. महिलाओं को प्रायः श्वेत प्रदर अथवा मासिक धर्म की गड़बड़ियों के कारण उनके कमर में दर्द का लक्षण मिलता है.

कमर दर्द के लक्षण क्या हैं ?

  • रोगी की कमर में दर्द रहना.
  • तापक्रम कभी बढ़ा हुआ मिलता है और कभी नहीं भी मिलता है.
  • प्रभावित स्थान को दबाने या हिलाने- डुलाने से दर्द अधिक होता है.
  • जब दर्द तीव्र स्वरूप का होता है तब खातट से उठना भी मुश्किल हो जाता है.
  • तंतुशोथ होने के प्रमुख लक्षण होते हैं- कटि प्रदेश में दर्द और अकड़न होना. यह दर्द रीढ़ को घुमाने, झुकाने या ऐंठने पर या ठंड लगने, आर्द्र मौसम में या मानसिक तनाव के बाद बढ़ जाता है. अकड़न सबसे ज्यादा सुबह के समय बिस्तर पर से उठने पर होती है. यह स्थिति या तो खुद ही ठीक हो जाती है या पुनरावृति होती है अथवा स्थाई तौर पर ठहर जाती है. लेकिन गतिशीलता में कोई बाधा नहीं आती है और ना ही कोई असमर्थता होती है. या दैहिक स्वास्थ्य में कोई गिरावट आती है. यहां तक कि x-rey चित्र में भी कोई दोष नहीं दिखाई देता है.

कमर दर्द का निदान-

जब कोई रोगी शूल निवारण हेतु चिकित्सक के पास आता है तो चिकित्सक को चाहिए कि रोग निदान हेतु रोगी से ऐसे प्रश्न करें जिससे कि रोगी के विशिष्ट तंत्रिका तंत्र की विकृति का पता लग सके. साथ ही रोगी के छींकने व खांसने पर दर्द घटता अथवा बढ़ता है इसकी भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए.

निम्न लक्षणों के आधार पर विशिष्ट तंत्रिकाजन्य में रोग का निदान किया जाता है-

  • कटि प्रदेश में मेंखला शूल तथा नेत्र तारे और तंत्रिका अगर अन्य प्रतिक्रियाएं मिलने पर टेबीस डॉर्सेलिस नामक रोग की शंका करनी चाहिए.
  • यदि वृद्धावस्था में कटि प्रदेश के तंत्रिका मूल में दर्द हो एवं रोगी में उपदंश का इतिहास मिले तो उक्त स्थान पर किसी न किसी प्रकार के उपदंश की संभावना समझना चाहिए.
  • यदि रोगी आगे की ओर कमर झुकाकर चलता हो तो रीढ़ का यक्ष्मा रोग समझना चाहिए.
  • यदि शूल का स्थान बदलता हो तथा उसका संबंध किसी विशेष तंत्रिका से ना हो तो हिस्टीरिया जन्य अथवा किसी अन्य सामान्य रोग के कारण इसकी शंका करनी चाहिए.
  • किसी- किसी मामले में यह कटिशूल अपेंडिसाइटिस तथा गैस्ट्रिक अल्सर में भी होता है.

जांच एवं परीक्षण-

कमर दर्द के उपचार के लिए जब आप डॉक्टर के पास जाएंगे तो वह निम्नलिखित सवाल कर सकता है?

  • जब कमर दर्द शुरू हुआ तो आप क्या कर रहे थे ?
  • दर्द अचानक शुरू हुआ या धीरे-धीरे दर्द बढ़ा?
  • आप शरीर के किन- किन भागों में दर्द का अनुभव कर रहे हैं ?
  • दर्द कैसा है बहुत तेज, हल्का फीवर या जलन वाला ?
  • दर्द क्या लगातार होता है या रुक रुक कर ?
  • क्या आपको शरीर के किसी भाग में सुन्नता या सुइयां चुभना सा महसूस होता है ?
  • क्या इस प्रकार का दर्द पहले भी कभी हुआ था या पहली बार ही हुआ है ?
  • आप किस प्रकार के काम करते हैं ?
  • आप दिन में कौन से ऐसे काम करते हैं जिनसे आपकी पीठ पर जोर पड़ती है.
  • दर्द का आरंभ कमर के किस भाग से हुआ था ?
  • कमर दर्द शुरू होने से पहले क्या किसी प्रकार का बुखार अथवा शरीर के अन्य अंगों में दर्द हुआ था ?
  • आपको यह दर्द कितने समय से है ? इत्यादि.

कमर दर्द दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय-

1 .अश्वगंधा चूर्ण 3 ग्राम और महायोगराज गूगल 2 वटी सुबह-शाम दूध के साथ सेवन कराएं.

2 .चंद्रप्रभा या चंद्रकला वटी 2 वटी पानी या चाय के साथ सुबह- शाम सेवन कराएं.

3 .कमर पर महानारायण तेल से मालिश करके सेक करें.

4 .अहार्णव 9 ग्राम सुबह- शाम दूध के साथ सेवन कराएं.

5 .वसंत बहार रसायन 10 ग्राम सुबह-शाम सेवन कराएं.

6 .छुहारे को दूध में पकाकर खिलाएं और दूध पिलाएं एवं शक्ति वर्धक पदार्थ सेवन कराएं.

नोट- उपर्युक्त चिकित्सा चिकित्सक की देखरेख में कुछ दिनों तक करने से कमर दर्द की समस्या दूर हो जाती है.

कमर दर्द दूर करने के घरेलू उपाय-

1 .कमर दर्द से राहत पाने के लिए सरसों तेल में लहसुन जलाकर मालिश करना फायदेमंद होता है. इससे दर्द से तुरंत राहत मिलता है.

कमर दर्द ( कटि वेदना ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार

2 .500 ग्राम सरसों तेल में लहसुन 50 ग्राम, अकवन की जड़ी 10 ग्राम, धतूरे का एक फल, जहर कनैल फूल का जड़ 10 ग्राम, मेथीदाना 5 ग्राम और थोड़ा सा खैनी को मिलाकर अच्छी तरह से जलाकर छान लें. इसके बाद उसमें भीमसेनी कपूर की 2-3 टिकिया डालकर ठंडा होने पर सुरक्षित बोतल में रख लें और जरूरत के अनुसार तेल को कटोरी में लेकर हल्का गर्म करके दर्द वाले हिस्से पर मालिश करें. इससे सभी तरह के दर्द से राहत मिलेगा.

3 .अजवाइन को तवे पर धीमी आंच में सेक कर इसे धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं कमर दर्द से राहत मिलेगी.

4 .नमक मिले गर्म पानी में एक तौलिया भिगोकर निचोड़कर और दर्द वाले स्थान पर तौलियां से सिकाई कीजिए लाभ होगा.

5 .कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से मिलाएं. अब इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें. अब कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से राहत मिलता है.

6 .कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियों में कमजोरी हो जाती है. इसलिए कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन करें.

7 .कमर दर्द के लिए व्यायाम करना चाहिए- सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम है. तैराकी जहां वजन तो कम करती है वहीं कमर के लिए भी लाभकारी होता है. साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए. व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा.

8 .योग भी कमर दर्द में फायदेमंद होता है. इसके लिए भुजंगासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, स्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो कि कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं. कमर दर्द के योगासनों को योग गुरु की देखरेख में ही करना चाहिए.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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