अगर राजा- महाराजाओं की तरह बढ़ाना चाहते हैं मर्दाना ताकत तो आज से शुरू कर दें इन चीजों का सेवन

हेल्थ डेस्क- आजकल के समय में हम ऐसा लाइफस्टाइल को जी रहे हैं जिसमें फीट व स्वस्थ रहना मुश्किल हो गया है. बीमारियां और शरीर में तमाम परेशानियाँ इसी कारण पैदा होती है. गलत लाइफस्टाइल की यह समस्या महिलाओं में बाँझपन तो पुरुषों के फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया पर प्रभाव डाल रही है. इसके लिए जरूरी है कि लाइफस्टाइल और डाइट में सुधार किया जाए. साथ ही ऐसे आयुर्वेदिक जड़ी- बूटियों का इस्तेमाल किया जाए जिससे शारीरिक कमजोरी और मर्दाना ताकत पर बुरा असर ना पड़े.

अगर राजा- महाराजाओं की तरह बढ़ाना चाहते हैं मर्दाना ताकत तो आज से शुरू कर दें इन चीजों का सेवन
अगर राजा- महाराजाओं की तरह बढ़ाना चाहते हैं मर्दाना ताकत तो आज से शुरू कर दें इन चीजों का सेवन

आज हम इस लेख के माध्यम से जिन जड़ी- बूटियों के बारे में बताने जा रहे हैं उनके सेवन से न केवल शारीरिक क्षमता में वृद्धि होती है बल्कि इसके सेवन से फर्टिलिटी में भी सुधार होती है. नपुंसकता, शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी जैसी समस्याओं को यह जड़ से खत्म करती है.

आयुर्वेद की मानें तो ये जड़ी- बूटियां प्राचीन काल से ही शारीरिक ताकत और मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है. राजा महाराजाओं के जमाने में भी इनका इस्तेमाल किया जाता था तो अगर आप भी चाहते हैं राजा महाराजाओं की तरह शारीरिक और मर्दाना ताकत को मजबूत रखना तो इन जड़ी बूटियों का सेवन करके आप लाभ उठा सकते हैं.

अगर राजा- महाराजाओं की तरह बढ़ाना चाहते हैं मर्दाना ताकत तो आज से शुरू कर दें इन चीजों का सेवन
अगर राजा- महाराजाओं की तरह बढ़ाना चाहते हैं मर्दाना ताकत तो आज से शुरू कर दें इन चीजों का सेवन

चलिए जानते हैं उन जड़ी- बूटियों के बारे में-

1 .शिलाजीत-

शिलाजीत का इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से कई रोगों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है. शिलाजीत का इस्तेमाल यौन संबंधित समस्याओं को दूर करने में काफी मददगार होता है. शिलाजीत टेस्टोस्टेरोन, शुक्राणु जनन, शुक्राणु गतिशीलता, पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए जाना जाता है. इतना ही नहीं शिलाजीत महिलाओं में ओवोजेनेसिस में वृद्धि करता है. शिलाजीत चार प्रकार का होता है. लाल, काली, नीली और पीली. इनमें से काली शिलाजीत सबसे प्रभावी माना जाता है. शिलाजीत का सेवन कभी भी अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए. इसकी खुराक को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए. शुरुआत में प्रतिदिन 300 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक शिलाजीत का सेवन किया जा सकता है.

2 .अश्वगंधा-

अश्वगंधा एक चमत्कारी जड़ी- बूटी है जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद गुप्त रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है. इसे भारत में कई जगहों पर भारतीय जिन्सेंग कहा जाता है. अश्वगंधा की जड़ का इस्तेमाल कई प्रकार की दवाइयों के निर्माण में किया जाता है. इसके सेवन से कमजोरी, थकान, शुक्राणुओं की कमी, इम्यूनिटी की समस्या, सेक्स कमजोरी, स्वप्नदोष की समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है. इसके लिए रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ एक चम्मच अश्वगंधा का सेवन करना फायदेमंद होता है.

3 .सफेद मूसली-

सफेद मूसली बहुत ही शक्तिशाली जड़ी- बूटियों में से एक है जो ना सिर्फ शारीरिक ताकत को बढ़ाने में मददगार है बल्कि यौन क्षमता को बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके सेवन से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, इनफर्टिलिटी, स्पर्म की कमी, कमजोरी समस्या दूर हो जाती है. इसके लिए सफेद मूसली को पाउडर बना लें. अब उतना ही मात्रा में मिश्री का पाउडर मिलाकर सुरक्षित रख लें. अब इसमें से एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें. यह पुरुषत्व को बढ़ाने में अद्वितीय है.

4 .शतावरी-

शतावरी महिलाओं के गुप्त रोगों को दूर करने के लिए अच्छी जड़ी- बूटी मानी जाती है. लेकिन यह पुरुषों के हार्मोन लेवल को भी बढ़ाकर उनकी कामशक्ति को मजबूत करता है. पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, कमजोरी, शुक्राणुओं की कमी के साथ यौन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है. इसके लिए शतावरी को पीसकर पाउडर बना लें अब उतना ही मात्रा में मिश्री का पाउडर मिलाकर सुरक्षित रख लें और इसमें से एक चम्मच की मात्रा गुनगुने चीनी मिले दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें.

5 .केसर-

केसर का इस्तेमाल सदियों से स्वास्थ्य और सौंदर्य वर्धक उपायों के लिए किया जाता रहा है. केसर की तासीर गर्म होती है. केसर हमारे शरीर की कमजोरी को दूर करके ताकत प्रदान करता है. केसर का इस्तेमाल प्राचीन समय से राजा महाराजा भी किया करते थे. केसर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, शुक्राणुओं की कमी, कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण औषधि है. इसके लिए गुनगुने दूध में एक चुटकी केसर मिलाकर रात को सोने से पहले पीना चाहिए.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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