बरसात के मौसम में होने वाली 8 प्रमुख बीमारियां, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

हेल्थ डेस्क- बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा अधिक हो जाता है क्योंकि बरसात के मौसम में नमी और पानी के कारण संक्रमण फैलने के लिए सबसे ज्यादा संभावना होती है. बरसात के मौसम में जहां-तहां पानी का जमाव होने लगता है. जिससे मच्छर के अलावे कई तरह के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं.

बरसात के मौसम में होने वाली 8 प्रमुख बीमारियां, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

बरसात के मौसम में होने वाले आठ प्रमुख बीमारियों में निम्न है-

1 .मलेरिया.

2 .डेंगू.

3 .डायरिया.

4 .हैजा.

5 .चिकनगुनिया.

6 . कोल्ड और फ्लू.

7 .लेप्टोस्पायरोसिस-

8 .टाइफाइड-

1 .मलेरिया- यह बीमारी बरसात में होने वाली आम बीमारियों में से एक है. लेकिन गंभीर संक्रामक बीमारी है जो जलजमाव से पैदा होने वाले मच्छरों के काटने से होती है. मलेरिया रोग मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है.

लक्षण- यह बुखार आम तौर पर एक दिन छोड़कर आता है और ठंढ भी लगती है.इसके अलावा ठंढ के साथ तेज बुखार और गर्मी के साथ तेज बुखार, पसीने के साथ बुखार कम होना और कमजोरी लगना, सिर दर्द आदि.

मलेरिया होने से बचने के लिए आसपास पानी का जलजमाव ना होने दें और रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें.

2 ,डेंगू फीवर- डेंगू फीवर भी मच्छरों के काटने से ही होने वाला बीमारी है. लेकिन डेंगू फैलाने वाले मच्छर साफ पानी में पनपते हैं. इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए. डेंगू फीवर एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है.

लक्षण- इस रोग का प्रभाव मरीज के पूरे शरीर और जोड़ों में तेज दर्द के रूप में होता है. बुखार तेज होना, जि मिचलाना, आँखों के पीछे दर्द, चकते होना और थकान होना आदि लक्षण हैं.

डेंगू फीवर से बचने के लिए मच्छरों से बचें. घर में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. घर से निकलने से पहले शरीर को पूरी तरह से ढककर निकलें.

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3 .डायरिया- यह बीमारी बरसात के मौसम होने वाली बीमारियों में से एक आम बीमारी है जो कि जीवाणुओं के संक्रमण के कारण होता है. डायरिया बीमारी में पेट में मरोड़ होने के साथ ही दस्त आने की समस्या होती है यह खासतौर पर बरसात में प्रदूषित पानी और खाद पदार्थों के सेवन करने के कारण होता है इस बीमारी से बचाव के लिए खाद पदार्थों को ढक कर रखें पानी उबालकर और छानकर कीजिए खाद्य पदार्थ को सोने से पहले हाथ की साफ- सफाई का विशेष ध्यान रखें, इसके अलावा खानपान का भी विशेष ध्यान रखें. सड़ा- गला, बासी भोजन से दूर रहें.

4 .हैजा- विब्रियो कोलेरा नामक जीवाणु के कारण फैलने वाला रोग है. यह दूषित भोजन और पेय पदार्थों के कारण होता है. इस बीमारी में ऐठन के साथ लगातार होने वाली उल्टी- दस्त इस रोग के मुख्य लक्षण हैं. जिसके कारण शरीर में पानी की कमी होना और मिनरल्स की कमी हो जाती है. जिसके कारण इस बीमारी से ग्रसित मरीज बहुत ही कमजोर हो जाता है. इससे बचने के लिए खाने- पीने संबंधी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.

5 .चिकनगुनिया- यह बीमारी भी मच्छरों से फैलने वाला है. इसमें भी बुखार आता है इसका संक्रमण होने पर मरीज के शरीर के जोड़ों पर भी होता है और जोड़ों में तेज दर्द होता है. चिकनगुनिया लंबे समय तक चलने वाला जोड़ों का रोग है जिसमें जोड़ों में तेज दर्द होता है. इस रोग का उग्र चरण तो मात्र 2 से 5 दिन के लिए रहता है. लेकिन जोड़ों का दर्द महीनों या हफ्तों तक बना ही रहता है. चिकनगुनिया विषाणु एक आर्ब विषाणु है जिसे अल्फा विषाणु परिवार का माना जाता है. यह मानव एडिस मच्छर के काटने से प्रवेश करता है. यह विषाणु के लक्षण वाली बीमारी पैदा करता है. जिस प्रकार की स्थिति डेंगू रोग में होती है. इससे बचने के लिए जलजमाव से बचे ताकि उस में पनपने वाले मच्छर बीमारी ना फैला पाए.

6 . कोल्ड और फ्लू- बरसात के मौसम के दौरान होने वाले तापमान में भारी उतार-चढ़ाव के कारण शरीर बैक्टीरिया और वायरल की प्रति अतिसंवेदनशील हो जाता है. जिसके कारण सर्दी और फ्लू होता है. यह वायरल संक्रमण का सबसे आम रूप है. इसलिए शरीर की रक्षा के लिए अत्यधिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना चाहिए. इससे शरीर सभी विषाक्त पदार्थों के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन करके कीटाणुओं से लड़ सकता है और काफी हद तक दूसरी भी बीमारियों से बचा जा सकता है.

7 .लेप्टोस्पायरोसिस- मौसमी बीमारियों में लेप्टोस्पायरोसिस ऐसी ही एक बीमारी है जो मानसून के दौरान बढ़ जाता है. साल 2013 में भारत में इस रोग ने पांव पसारे थे. अब प्रत्येक साल इस बीमारी के कारण लगभग 5000 से अधिक लोग इसके चपेट में आते है. लेप्टोस्पायरोसिस जानवरों के यूरिन- स्टूल से फैलने वाले लेप्टोस्पाइडा नामक बैक्टीरिया के कारण से होती है. इससे इंसान के साथ-साथ यूरिन के संपर्क में आने से पालतू जानवर और चूहे भी संक्रमित होते हैं. बरसात के मौसम में इस इंफेक्शन के फैलने की संभावना अधिक हो जाती है.

इस बीमारी में 100 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार हो जाता है. अचानक सिर दर्द, ठंड लगना, मतली और उल्टी, भूख में कमी, पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में दर्द, खांसी आदि इसके आम लक्षण है.

8 .टाइफाइड- टाइफाइड बुखार तो सालों भर होने वाली बीमारी है. लेकिन बरसात के मौसम में अक्सर इस बुखार से ज्यादा लोग पीड़ित होते हैं. टाइफाइड बुखार दूषित भोजन और पानी की वजह से होता है. यह सालमोनेला टायफी जीवाणु से फैलता है. लंबे समय तक बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, कमजोरी, गले में खराश हों, सीने और पेट पर लाल चकते पड़ना, लगातार खांसी आना, पसीना आना, वजन कम होना, मतली, भूख न लगना और कब्ज या कभी-कभी दस्त जैसी समस्याएं देखने को मिलते हैं. गंभीर मामलों में इससे ग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है.

कई तरह की बरसात में होने वाली बीमारियों की तरह हेपेटाइटिस ए भी संक्रमण, दूषित भोजन और पानी की वजह से होता है जो मुख्य रूप से यकृत को प्रभावित करता है. हेपेटाइटिस ए के कुछ सामान्य लक्षण बुखार, उल्टी, दाने आदि दिखलाई देते हैं. हालांकि उचित स्वच्छता बनाए रखना इस स्थिति के जोखिम को कम कर सकता है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी तरह के शरीर में लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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