अमृत तुल्य औषधि है गिलोय, जाने गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके

हेल्थ डेस्क– गिलोय बहुत ही चमत्कारी गुणों से भरपूर लता जाती की औषधि है. आयुर्वेद में गिलोय को कई नामों से जाना जाता है जैसे- अमृता, गुरुची, गुडूची, गुरीच, छिन्नरुहा, चक्रांगी. इत्यादि बहुवर्षायु तथा अमृत के समान कार्य होने के कारण इसे आयुर्वेद में अमृता कहा गया है. आयुर्वेद में गिलोय को बुखार की महान औषधि माना गया है एवं इसे जीवंतिका नाम से पुकारा गया है.

गिलोय के बारे में आयुर्वेद ग्रंथों में बहुत सारे उपयोग और फायदे बताए गए हैं. आयुर्वेद में गिलोय को रसायन माना गया है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. गिलोय के पत्ते स्वाद में कसाय, कड़वे और तीखे होते हैं. गिलोय का उपयोग कर वात, पित्त और कफ शमन किया जा सकता है यानि यह त्रिदोष नाशक है. यह पचने में भी आसान होती है, इसके सेवन से भूख बढ़ता है. साथ ही आंखों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है.

गिलोय के इस्तेमाल से अधिक प्यास लगना, शरीर में जलन होना, मधुमेह की बीमारी, कुष्ठ रोग और पीलिया रोग में लाभ ले सकते हैं. इसके साथ ही गिलोय का सेवन वीर्य और बुद्धि को बढ़ाती है एवं बुखार, उल्टी, सूखी खांसी, की दम्मा, टीबी आदि में गिलोय रामबाण की तरह काम करती है. इतना ही नहीं महिलाओं में शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह काफी गुणकारी औषधि है.

गिलोय की लता कभी ना सुखने वाली है. इस लता रस्सी के सामान लगता है. इसके कोमल तनों तथा शाखाओं से जुड़े निकलती है इसके पत्ते कोमल तथा पान के पत्ते के आकार के होते हैं. इसके फल मटर के दाने जैसे होते हैं. यह जिस पेड़ पर चढ़ती है उस पेड़ के कुछ गुण भी इसके अंदर आ जाते हैं. इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़ाई गई गिलोय सबसे अच्छी मानी जाती है.

आधुनिक आयुर्वेदाचार्य के अनुसार गिलोय नुकसानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों तक को भी खत्म करती है. टीबी रोग का कारण बनने वाले जीवाणु की वृद्धि को रोकती है. आंत और यूरिन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले जीवाणुओं को भी खत्म कर देती है.

गिलोय के फायदे इस्तेमाल करने के तरीके-

गिलोय के औषधीय गुण और गिलोय के फायदे बहुत तरह के बीमारियों के लिए लाभदायक हैं. लेकिन सही जानकारी ना होने पर यह कई बार स्वास्थ्य पर उल्टा असर भी डाल सकती है. इसलिए गिलोय का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा और तरीके का सही ज्ञान होना आवश्यक है.

1 .बुखार में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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अगर किसी को बार- बार बुखार आने की समस्या है तो उसे गिलोय का सेवन करना काफी लाभदायक होगा. यह हर तरह के बुखार से लड़ने में मदद करती है. इसलिए डेंगू के मरीजों को इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है. डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी यह छुटकारा दिलाती है. इसके लिए 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह से मसल कर मिट्टी के बर्तन में 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर रात भर ढक कर रखें. अब सुबह इसे मसल कर छानकर प्रयोग करें. इसकी 20 मिलीलीटर की मात्रा दिन में 3 बार पीने से हर तरह के बुखार में लाभ होता है.

2 .रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

अमृत तुल्य औषधि है गिलोय, जाने गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके
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गिलोय एक ऐसी चीज है जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई बीमारियों से दूर रखती है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं. यह खून को साफ करती है. बैक्टीरिया से लड़ती है. लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल गिलोय की बहुत सारे कामों में से एक है. यह दोनों ही खून को साफ करने का काम करते हैं. इसके लिए एक अंगुल के बराबर गिलोय को छोटे-छोटे टुकड़े कर रात भर एक कप पानी में भिगो कर रखें. सुबह इसे अच्छी तरह से मसलकर पानी छानकर सुबह खाली पेट प्रतिदिन पिएं.

3 .पीलिया रोग में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

गिलोय के औषधीय गुण पीलिया रोग को दूर करने में काफी मदद करते हैं. गिलोय की 20 से 30 मिलीलीटर काढ़ा में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पिलाने से पीलिया रोग में अच्छा लाभ होता है. गिलोय के 10 पत्तों को पीसकर एक गिलास में मिलाकर तथा छान कर सुबह के समय खाली पेट पीने से पीलिया रोग ठीक होता है. गिलोय के छोटे-छोटे टुकड़ों की माला बनाकर पहनने से भी पीलिया रोग में लाभ होता है.

4 .कब्ज के लिए गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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आज के समय कब एक आम समस्या हो गई है इससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे काफी प्रभावित होते देखे जा रहे हैं कब्ज की समस्या को दूर करने में गिलोय काफी मददगार है इसके लिए गिलोय को 10 से 20 मिलीलीटर रस के साथ गुड़ का सेवन करने से अच्छा लाभ होता है शोध था तथा गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर पानी में कहा बनाएं इस कारण 1 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से गैस एवं कब की समस्या काफी आराम मिलता है

5 .बवासीर में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

आजकल के खान-पान के कारण बवासीर होना एक आम समस्या बन गई है. बवासीर को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय काफी उपयोगी साबित हो सकती है. इसके लिए हरड़, गिलोय तथा धनिया को बराबर भाग 20 ग्राम लेकर आधा लीटर पानी में उबालें. जब एक चौथाई पानी रह जाए तो इसे छानकर शहद डालकर सुबह-शाम पीने से बवासीर की बीमारी ठीक होती है. काढ़ा बनाकर पीने पर भी गिलोय के फायदे पूरी तरह मिलते हैं.

6 .टीबी रोग में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

गिलोय का औषधीय गुण टीबी रोग को दूर करने में काफी मददगार होता है. इसके लिए गिलोय, अश्वगंधा, शतावर, दशमुल, बलामूल, अडूसा तथा कसीस को बराबर मात्रा में लेकर इसका काढ़ा बनाएं और इसमें से 20 से 30 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम टीबी से ग्रसित मरीज को सेवन करने से टीबी की बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है.

7 .उल्टी होने पर गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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गिलोय उल्टी रोकने में भी काफी मददगार औषधि है. एसिडिटी के कारण उल्टी हो रही हो तो 10 मिलीलीटर गिलोय के रस में 5 ग्राम मिश्री मिला लें. इसे सुबह और शाम पीने से उल्टी बंद हो जाती है. 20 से 30 मिलीलीटर गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर पीने से बुखार के कारण होने वाली उल्टी रुक जाती है.

8 .मधुमेह रोग में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट्स है यानी शर्करा की मात्रा को कम करने में मदद करती है. इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है जिसका लाभ टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को होता है. मधुमेह की बीमारी में गिलोय शुगर लेवल को कंट्रोल करने में कारगर है. गिलोय, पठानी, लोध, लाल चंदन, नागरमोथा, आंवला और हरड़ इसके साथ ही परवल की पत्ती, नीम की छाल तथा पद्माख इन सभी चीजों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर कपड़छान चूर्ण कर रख लें. इस चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें. इससे मधुमेह में अच्छा लाभ होता है.

9 .पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

गिलोय पाचन शक्ति को बेहतर बनाने के लिए काफी लाभदायक होती है. इसके सेवन से भोजन को पचने की प्रक्रिया में मदद मिलती है. इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की समस्याओं की बच सकता है. इसके लिए ऊपर कब्ज में बताई गई विधि से गिलोय का सेवन करना चाहिए.

10 .तनाव को कम करने में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

आज के समय में तनाव यानि स्ट्रेस बहुत बड़ी समस्या बन गई है. गिलोय एडेप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता के स्तर को कम करती है. इसकी मदद से न केवल यादाश्त शक्ति बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी मजबूत रहती है और एकाग्रता बढ़ती है. इसके लिए आप गिलोय तो काढ़ा बनाकर नियमित सुबह खाली पेट सेवन कर सकते हैं.

11 .आंखों के रोग में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

आंखों के रोग में गिलोय काफी लाभदायक होती है. इसके सेवन से आंखों के आगे अंधेरा छाना, आंखों में चुभन और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं. इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनाएं और 20 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें. इससे आँखों की रोशनी बढती है.

12 .अस्थमा में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो किसी को एक बार हो जाए तो ठीक होना मुश्किल हो जाता है. खासकर मौसम के परिवर्तन पर सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को काफी परेशानी होती है. अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस बनाकर पीना चाहिए. इससे अस्थमा के मरीजों को काफी आराम मिलता है.

13 .गठिया और जोड़ों के दर्द में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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गठिया यानी अर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है बल्कि जोड़ों में अकड़न भी होती है. इससे चलने- फिरने में भी परेशानी होती है. लेकिन इसके लिए गिलोय काफी मददगार औषधि है क्योंकि गिलोय में एंटी अर्थराइटिस गुण होते हैं. जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित कई बिमारियों में लाभ पहुंचाती है. इसके लिए प्रतिदिन गिलोय का काढ़ा पीना लाभदायक हो सकता है.

14 .लीवर के विकार में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

अगर किसी को लीवर से जुड़ी समस्या हो तो 18 ग्राम ताजी गिलोय, 2 ग्राम अजमोद, 2 नग छोटी पीपल एवं 2 नग नीम को लेकर कूटकर इन सबको मसलकर रात में 250 मिलीलीटर पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में रख दें. सुबह पीसकर छानकर रोगी को पिला दें. 15 से 30 दिन तक सेवन करने से लीवर व पेट की समस्याएं तथा अपच, कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है.

15 .एनीमिया में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

अक्सर भारतीय महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी देखी जाती है. जिसके कारण उन्हें हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में गिलोय का सेवन शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है. इसके लिए 10 से 15 मिलीलीटर गिलोय का काढ़ा को अनार के जूस में मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन किया जा सकता है.

16 .कान के रोगों में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

कान की बीमारी में भी गिलोय काफी लाभदायक होती है. कान की मैल बाहर नहीं आ रहा हो तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीसकर उबालने ठंडा करके कुछ बूंदें कान में डालें. एक-दो दिन में ही सारा मैल अपने- आप ही निकल जाएगा और कान में यदि फोड़े- फुंसियां हो तो ठीक हो जाएगी.

17 .पेट की चर्बी कम करने के लिए गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

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आज के समय पेट की चर्बी से महिला या पुरुष काफी परेशान रहते हैं. इसे कम करने के कई उपाय ढूंढ रहे होते हैं लेकिन गिलोय इस समस्या से छुटकारा दिलाने में काफी मददगार साबित हो सकता है. शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक करती है, सूजन को कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ती है, ऐसा होने से पेट के आसपास जमा चर्बी कम हो जाती है. आपका वजन कम होता है. इसके लिए 10 से 20 मिलीलीटर गिलोय के काढ़े में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण मिलाकर रात को खाना खाने के बाद पीना लाभदायक हो सकता है.

18 .खूबसूरती बढ़ाने और जवान रखने में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

गिलोय ना केवल सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि सौंदर्य के लिए भी काफी लाभदायक है. यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारिक रूप से असर दिखाती है क्योंकि गिलोय एंटी एजिंग होते हैं जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, दाग, लकीरें और झुर्रियां इत्यादि को दूर की जा सकती है. इसके सेवन से आप निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं. जिसकी कामना हर किसी को होती है. अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भर जाते हैं. त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें, एक बर्तन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल को गरम करें. गरम तेल में पत्तियों का पेस्ट को मिलाकर के घाव पर लगाएं. इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है. जिससे आप जवान नजर आते हैं.

19 .बालों की समस्या में गिलोय के फायदे और इस्तेमाल करने के तरीके-

अगर आप बालों में डैंड्रफ, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय का सेवन आपकी इन समस्याओं को दूर कर देगी. इसके लिए आप गिलोय का जूस, काढ़ा या चाय के रूप में नियमित इस्तेमाल कर सकते हैं.

कैसे कर सकते है गिलोय का इस्तेमाल-

गिलोय का जूस बनाकर- 

गिलोय की डंडियों को छोटे-छोटे टुकड़े में काटकर मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर रस निकल कर सुबह-सुबह खाली पेट पिएं. ऐसे अलग-अलग ब्रांड के गिलोय जूस बाजार में उपलब्ध है.

गिलोय का काढ़ा बनाकर-

गिलोय 4 इंच की डंडी को छोटा-छोटा काट लें. इन्हें कूटकर एक कप पानी में रात भर भिगो कर रखें. अब सुबह इसे उबालें. जब आधा रह जाए तो छानकर पिएं. अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी के पत्ते भी डाल सकते हैं. स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें शहद मिलाया जा सकता है.

गिलोय का पाउडर बनाकर-

गिलोय को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर धूप में सुखा लें. इसके बाद सुख जाने पर मिक्सर में पीस कर पाउडर बनाकर सुरक्षित रख लें. अब इसमें से आवश्यकतानुसार आधा से एक चम्मच की मात्रा में सेवन कर सकते हैं.

गिलोय का गोलियां और सत बनाकर-

गिलोय का इस्तेमाल गोलियां एवं सत के रूप में इस्तेमाल की जाती है. आप इसे घर पर भी बना सकते हैं लेकिन यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती है.

गिलोय के नुकसान और सावधानियां-

गिलोय के फायदे पढ़कर आपको बहुत से लाभों के बारे में जानकारी मिल चुकी है. लेकिन अगर इसका इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक की जाए तो नुकसान भी हो सकते है.

तो चलिए जानते हैं गिलोय के नुकसान क्या है और किन परिस्थितियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए ?

गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान-

गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय से परहेज करने की सलाह दी जाती है हालांकि गर्भावस्था के दौरान उचित मात्रा में इसके सेवन से कोई नुकसान नहीं होता है फिर भी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बिना सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है.

न्यून रक्तचाप-

जो लोग पहले से ही न्यून रक्तचाप यानी लो ब्लड प्रेशर के मरीज हैं उन्हें गिलोय के सेवन से परहेज करना चाहिए क्योंकि इसका सेवन ब्लड प्रेशर को कम करती है. इससे मरीज की स्थिति खराब हो सकती है. इसी तरह किसी सर्जरी से पहले भी गिलोय का सेवन किसी भी रूप में नहीं करना चाहिए. क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को कम करती है जिससे सर्जरी के द्वारा परेशानियां बढ़ सकती है.

ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा-

गिलोय का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी पावर मजबूत होती है. लेकिन कई बार यूनिट से अधिक सक्रिय होने के कारण ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस या रूमेटाइड अर्थराइटिस आदि से पीड़ित मरीजों को गिलोय से परहेज रखने की सलाह दी जाती है.

डिस्क्लेमर-

यह लेख सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. इसलिए किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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