जानें- बेहोशी होने के कारण, लक्षण और आपातकालीन उपचार

हेल्थ डेस्क- मनुष्य दिन भर कोई न कोई काम जरूर करता रहता है. इन कार्यों को संपन्न करने से उसे जोखिम भी उठाना पड़ता है. जोखिम के कार्यों में प्रायः चोट- चपेट का डर बना ही रहता है. अतः जब कभी चोट- चपेट के कारण संवेदनशीलता में किसी प्रकार की कमी आ जाती है तो उस दशा को बेहोशी या मूर्च्छा कहा जाता है. कई बार गंभीर बीमारी, गर्मी का अधिक होना, शरीर के किसी कोमल हिस्से में चोट लग जाना इत्यादि के कारण भी बेहोशी आ जाती है.

जानें- बेहोशी होने के कारण, लक्षण और आपातकालीन उपचार

अगर व्यक्ति पूरी तरह से बेहोश हो जाता है तो उसे अपने तन- बदन का होश नहीं रहता है. लेकिन यदि बेहोशी की हालत आधी है तो यानि व्यक्ति पूर्ण बेहोश नहीं हुआ है तो इधर- उधर देखकर वह कुछ कहने के लिए बार-बार उठता है या इशारे करता है. वैसे आमतौर पर बेहोशी या अर्ध बेहोशी की हालत में रोगी कोई हरकत नहीं करता है.

बेहोशी की दशा में रोगी की नाड़ी तथा श्वास की गति ठीक बनी रहती है. लेकिन कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि रोगी का शरीर कांपता रहता है. वह हाथ- पैर भी पटकता है क्योंकि उसके शरीर में दर्द भरी हड्कन होती है. उसके मुंह से लार भी गिरता है. रोगी गहरी नींद में सो जाता है. उसकी याददाश्त कम हो जाती है. कभी-कभी बेहोशी की हालत रोगी का मल- मूत्र भी निकल जाता है.

चलिए जानते हैं विस्तार से-

जब प्रमस्तिष्क परिसंचरण की कमी से कोई व्यक्ति मूर्छित होकर बेहोश हो जाता है तब उसे मूर्च्छा कहते हैं. इस अवस्था को मूर्च्छाजन्य अतिक्रम भी कहते हैं.

इसमें व्यक्ति को एकाएक बहुत शारीरिक कमजोरियां महसूस होने लगती है. वह सीधा खड़ा नहीं हो पाता है और चक्कर खाकर बेहोश हो जाता है. इसको फेंटिंग भी कहा जाता है. यह रोग सामान्य व्यक्तियों में भी हो सकता है.

बेहोशी होने की कौन- कौन से कारण हो सकते हैं ?

बेहोशी होने के लक्षण क्या है ?

  • रोग के प्रारंभिक लक्षणों में कमजोरी, गैस्ट्रिक ट्रबल, पसीना आना, बेचैनी, चक्कर तथा श्वास में अनियमितता हो जाती है.
  • रोगी को अचानक अजीब सी बेचैनी महसूस होती है.
  • जमीन व आसपास की चीजें रोगी को घूमती हुई नजर आने लगती है.
  • जी मिचलाता है, वह दिमाग से कुछ सोच नहीं पाता है.
  • जम्हाई आती है, आंखों के आगे धब्बे से और कालापन सा आ जाता है.
  • उसके सामने की कोई भी चीजें साफ दिखाई नहीं देती है और कानों से सुसु की आवाज सुनाई पड़ती है.
  • पूरे शरीर में ठंडा पसीना आ जाता है.
  • हाथ- पैरों में ताकत नहीं लगती है.
  • व्यक्ति चक्कर खाकर गिर जाता है.
  • कुछ समय तक बेहोश रहने के बाद कुछ मिनटों में अपने आप चेतना आ जाती है.
  • रोगी का चेहरा सफेद तथा हाथ- पैर शीतल ( ठंढे ) हो जाते है.
  • रक्तचाप ( ब्लड प्रेशर ) कम होकर 70 मिलीमीटर तक पहुंच जाता है.
  • रोगी की नाड़ी मुख्य रूप से हल्की अथवा तेज होती है.
  • यदि रोगी कमजोर हो तो बेहोशी धीरे-धीरे होता है. कभी-कभी मितली भी आती है.
  • आक्रमण के बाद सामान्य शारीरिक दुर्बलता बनी रहती है.

वेजो वेगल अटैक- भावावेश दबाव से, कोई चोट लगने से, तेज दर्द होने पर, ज्यादा कमजोरी होने से, बहुत दिनों तक आराम करने के बाद, खून की कमी में, बुखार में, भूखा रहने पर, बहुत देर तक धूप में खड़े रहने पर, कोई शोक भरी खबर एकाएक सुनने पर होता है.

बेहोशी का आपातकालीन उपचार क्या है ?

  • अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो जाए तो बेड पर लिटाकर  उसका सिर वाला भाग नीचे कर दें. जिससे मस्तिष्क में रक्त संचार अधिक हो.
  • रोगी को सीधा लिटा कर गर्दन व छाती के कपड़े ढीले कर दें और सिर को एक तरफ घुमा दें. जिससे कि जीभ पीछे जाकर गले को बंद ना कर पाए.
  • ठंडे पानी के छींटे मारे, इससे रोगी होश में आ जाएगा.
  • रोगी को अमोनिया सुन्घाएं, इसकी तेज गंध से रोगी को तुरंत होश आ जाता है.
  • जब तक रोगी पूर्ण रूप से होश में ना आ जाए तब तक उसके मुंह द्वारा कुछ भी ना दें.
  • व्यक्ति को होश में आने के बाद कुछ देर तक आराम कराएं, इसके बाद चाय अथवा ठंडा पानी पीने को दें.
  • वेजावेगल अटैक को छोड़कर अगर कोई अन्य कारण से व्यक्ति बेहोश हुआ हो तो उसके अनुसार उसे चिकित्सा की आवश्यकता होती है इसलिए व्यक्ति को डॉक्टर तक पहुंचाएं.
  • जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन की व्यवस्था कर उसे ऑक्सीजन देना चाहिए.
  • तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर व्यक्ति के नाक में 4-5 बूंद डालने से उसे शीघ्र होश हो जाता है.
  • व्यक्ति को होश में आने पर शुद्ध शहद चटाना चाहिए, इससे दोबारा बेहोश होने की संभावना बहुत कम हो जाती है.
  • सिर पर तथा शरीर पर तुलसी के पत्ते का रस मलने से हर प्रकार की बेहोशी दूर हो जाती है.
  • पीपल के फलों को सुखाकर जला लें. फिर उसका महीन चूर्ण बनाकर देसी घी में मिलाएं. इसे आंखों में काजल की तरह नित्य रात को सोते समय लगाएं. बेहोशी रोकने के लिए यह बहुत ही कारगर घरेलू नुस्खा है.
  • प्याज का रस सुंघाने और बूंद-बूंद कर मुंह में डालने से बेहोशी दूर हो जाती है.

    जानें- बेहोशी होने के कारण, लक्षण और आपातकालीन उपचार
  • पुदीना का रस नाक में डालने या सुंघाने से भी बेहोशी दूर होती है.
  • काली मिर्च पीसकर महीन पाउडर बना लें. फिर इस चूर्ण को नाक में रत्ती भर की मात्रा में डालें. ऐसा करने से बेहोश व्यक्ति होश में आ जाता है.
  • जानें- बेहोशी होने के कारण, लक्षण और आपातकालीन उपचार
  • लोबान की धूनी कुछ देर तक नाक में देने से भी बेहोश व्यक्ति होश में आ जाता है.
  • यदि किसी को बार-बार बेहोशी की समस्या होती रहती है तो एक चम्मच आंवले के चूर्ण को देशी घी में मिलाकर नियमित कुछ दिनों तक पिलाने से अच्छा लाभ होता है.
  • चूने का पाउडर, नौसादर का पाउडर और कपूर को बराबर मात्रा में लेकर किसी छोटे कांच की शीशी में डालकर हिलाकर इसे बेहोश व्यक्ति को सुंघाने से किसी भी तरह से आई बेहोशी ख़त्म होकर होश में आ जाता है.

नोट- ऊपर बताई गई चिकित्सा तत्काल बेहोश व्यक्ति को होश में लाने के लिए ही है. इसलिए बेहोशी के कारणों के अनुसार उचित इलाज करना आवश्यक है. यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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