विजयसार क्या है ? इससे बने ग्लास में पानी पीने से क्या लाभ होता है ? डायबिटीज के मरीज जरूर पढ़ें

हेल्थ डेस्क- रोगों को दूर करने के लिए आयुर्वेद में जड़ी- बूटियों, रस- भस्मों इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद में जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज संभव है. उन्हीं जड़ी- बूटियों में से एक है विजयसार का पेड़ जिसका इस्तेमाल डायबिटीज, गठिया, मोटापा, अर्थराइटिस, त्वचा एवं बालों के रोग, हाथीपाँव, ब्रोंकाइटीस, लीवर से जुडी समस्याएं इत्यादि जटिल बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है. विजयसार क्या है ? इससे बने ग्लास में पानी पीने से क्या लाभ होता है ? डायबिटीज के मरीज जरूर पढ़ें

विजयसार क्या है ? इससे बने ग्लास में पानी पीने से क्या लाभ होता है ? डायबिटीज के मरीज जरूर पढ़ें

आज हम इस लेख के माध्यम से विजयसार के पेड़ से कौन-कौन सी बीमारियों को दूर किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है इत्यादि के बारे में विस्तार से बताएंगे.

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विजयसार का पेड़ कैसा होता है ?

विजयसार का पेड़ मध्यम ऊंचाई से लेकर अधिक ऊंचाई वाला होता है. यह पतझड़ी वृक्ष है. जिसकी ऊंचाई 30 मीटर तक हो सकती है. यह भारत, नेपाल और श्रीलंका का मुख्य पेड़ है यानी इस क्षेत्र में अधिक पाए जाने वाला पेड़ है. भारत में पश्चिमी घाट तथा मध्य भारत के वनों में पैदा होता है. इसे विजयसार, बीजा साल, मुर्गा लकड़ी, बीजा आदि नामों से जाना जाता है.

इस पेड़ की छाल को काटने या चीरा लगाने पर एक लाल रंग के तरल का स्राव होता है. यह खून की तरह गाढ़ा लाल होता है इसलिए इसे ब्लीडिंग ट्री भी कहते हैं.

इस पेड़ की लकड़ी गहरे लाल कत्थई रंग की होती है. इसके पत्ते लगभग जामुन के पत्ते के समान एवं बीज चपटे चिरौल जैसे पर बड़े आकार के होते हैं. यह पेड़ अधिकांश साल ( सखुआ ) के वृक्षों के साथ पाया जाता है. साल के बनों में मौजूद रहता है. इस पेड़ की एक साथ बड़े झुण्ड नही होते हैं. साल के वृक्ष मिश्रित वनों में अधिकांश जहां-तहां विजयसार का पेड़ मिलता है.

इस पेड़ का औषधि मूल्य है. ऐसा कहते हैं कि इस पेड़ का स्राव व लकड़ी का काढ़ा मधुमेह की बीमारी का अच्छा उपचार है. इस पेड़ की लकड़ी से अच्छे फर्नीचर भी तैयार किए जाते हैं. हालांकि यह पेड़ अब लुप्त प्राय होता जा रहा है.

विजयसार एक प्रकार का लकड़ी है. इससे बने ग्लास में शाम को ताजा पानी भरकर रखें. रातभर इसमें पानी भरा रहने दें. इससे इसमें रासायनिक प्रतिक्रिया होती रहती है और इससे पानी शुरू में लाल और बाद में हरे रंग का दिखाई देने लगता है.

इस पानी को दिन में खाना के बाद दो बार पीना हमारे सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

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विजयसार से बने ग्लास में पानी पीने से क्या लाभ होता है?

  • विजयसार का उपयोग सुश्रुत संहिता में ( 1000 वर्ष बी.सी. से भी पूर्व ) मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए बताया गया है. लगातार शोध के बाद यह सिद्ध हुआ है कि इस गिलास में रखे पानी में जो लकड़ी का रस घुलता है उस घोल में मधुमेह बीमारी रोकने के प्रभावशाली गुण होते हैं. यह पेशाब की गति को भी नियंत्रित करके उसे सामान्य गति में लाता है.
  • पेट के हानिकारक कीड़ों को नष्ट करके पाचन शक्ति ठीक करता है.
  • बालों को झड़ने से रोक कर बालों को लंबा और काला करता है.
  • इस पानी को पीने से खून साफ करके त्वचा को चिकना और चमकीला बनाता है.
  • यह पानी अपने आप में स्वयं एक पूर्ण रसायन है. यह मधुमेह के रोगी के लिए एक गुणकारी औषधि की तरह काम करता है.
  • विजयसार रक्तगत शर्करा के स्तर को कम करने के साथ ही बैड कोलेस्ट्रोल को भी कम करता है. विजयसार का सेवन करने से यह मधुमेह के लक्षणों जैसे बार-बार पेशाब आना, तेज भूख लगना और प्यास लगना, शरीर में दर्द और जलन आदि की समस्या को दूर करता है.
  • विजयसार में मौजूद पोषक तत्व में आयरन भी मौजूद होता है यह आयरन की कमी को दूर करने के लिए मददगार होता है.
  • जिन लोगों को फाइलेरिया यानी हाथी पांव है उन्हें विजयसार की छाल का प्रयोग करना चाहिए. इससे सूजन कम होती है.
  • ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और खांसी जैसी समस्याओं से भी छुटकारा पाने के लिए विजयसार का उपयोग किया जा सकता है.
  • लिवर को स्वस्थ रखने के लिए विजयसार के पत्तों के रस का उपयोग किया जाता है. इसका नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होता है.
  • सोरायसिस, एक्जिमा इत्यादि चर्म रोगों की समस्या से बचने के लिए विजयसार की पत्तियों के पेस्ट का उपयोग करें या विजयसार के छाल से बने काढ़े का सेवन करने से खून साफ होगा जिससे चर्म रोगों की समस्या दूर रहती है.
  • अधिक थकान, सुस्ती या कमजोरी महसूस होने पर विजयसार की पत्तियों को उबालकर इसका काढ़ा बनाकर पीना फायदेमंद होता है.
  • अगर किसी की हड्डी टूट जाए तो विजयसार की छाल का प्रयोग करना फायदेमंद होता है. इससे हड्डियों को जोड़ने में मदद मिलती है.

विजयसार को उपयोग करने का तरीका-

विजयसार की लकड़ी को करीब 25 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. अब मिट्टी के एक बर्तन में पानी डालकर रात भर के लिए उसमें लकड़ी को भिगोकर छोड़ दें. सुबह यह पानी गहरे लाल रंग का हो जाता है. आपको यह पानी छानकर सुबह खाली पेट पीना होता है. इसी प्रकार से आप दोबारा से यह लकड़ी इतने ही पानी में डाल दीजिए तथा शाम को इस पानी को उबालकर तथा छान कर ठंडा होने पर पिजिए.

विजयसार के फायदे एक शब्दों में-

यह मोटापे को कम करती है, साथ ही यह आपकी फोड़े फुंसियों तथा त्वचा से जुड़ी समस्याओं को दूर करती है, इसके सेवन से आपके जोड़ों में होने वाली आवाज दूर हो जाती है, यह मधुमेह को नियंत्रित रखती है, अगर आपके हाथों- पैरों में कंपन होती है तो इसके निरंतर सेवन करने से कंपन दूर हो जाती है. अम्ल तथा पीत के रोगों में यह काफी फायदेमंद होती है. यह जोड़ों के दर्द तथा गठिया में बहुत फायदेमंद औषधि है. यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखती है. इस प्रकार से विजयसार लकड़ी शरीर की कई तरह की समस्याओं के लिए फायदेमंद है. डायबिटीज तथा अर्थराइटिस जैसी समस्याओं में इसके लाभ बहुत अच्छे होते हैं.

नोट- यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह एक बार जरूर लें. क्योंकि इसके प्रयोग करने का उचित सलाह एक योग्य चिकित्सक ही दे सकते हैं. धन्यवाद.

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मैं आयुर्वेद चिकित्सक हूँ और जड़ी-बूटियों (आयुर्वेद) रस, भस्मों द्वारा लकवा, सायटिका, गठिया, खूनी एवं वादी बवासीर, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि रोगों का इलाज करता हूँ।

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